मनपा पर 350 करोड रुपए बकाया, 22 करोड का कर्ज और 8 करोड रुपए दैनिक खर्च
महापौर और उपमहापौर को शासन से लानी पडेगी विशेष निधि

अमरावती/दि.3 – अमरावती में चार साल के प्रशासक राज के बाद, अमरावती मनपा में लोक प्रशासन का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है. महापौर और उप महापौर पदों के लिए चुनाव 6 फरवरी को होंगे, जिसके बाद ’नया शहर, नया शासन’ का समीकरण लागू होगा. महापौर के नेतृत्व में शहर की बागडोर एक बार फिर जन प्रतिनिधियों के हाथों में होगी. हालांकि, प्रशासक राज के दौरान अनगिनत अनावश्यक खर्चों और योजनाहीनता के कारण खजाना खाली हो गया है. इसी तरह, सरकारी खर्च दिन-प्रतिदिन बढ़ने के साथ-साथ कर्ज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है. वर्तमान में, अमरावती. मनपा पर 350 करोड़ रुपये का बकाया है और 22 करोड़ रुपये का कर्ज है, जबकि दैनिक खर्च 8 करोड़ रुपये है. चुनाव 15 जनवरी को हुए और परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए गए. हालांकि, किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. महायुति सरकार का गठन होगा और नव नियुक्त सदस्य विविध विकास के सपने के साथ मनपा में आएंगे.
* 350 करोड़ रुपये का कर्ज
मनपा पर विभिन्न रूपों में लगभग 350 करोड़ रुपये का बकाया है. व्यय की तुलना में आय के स्रोत बहुत सीमित हैं. जलापूर्ति, बिजली बिल, आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों के बिलों का भारी बकाया है. हालांकि स्वच्छता पर सबसे अधिक खर्च किया जाता है, फिर भी नागरिक संतुष्ट नहीं हैं, यह एक सच्चाई है.
* बहुत वादे किये
मनपा चुनावों के दौरान उम्मीदवारों या राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं से विकास के कई वादे किए गए हैं. इसलिए, पार्षदों को सरकार से मनपा निधि प्राप्त होने का इंतजार करना होगा.
* जीएसटी से 16.75 लाख रुपये
मनपा को सरकार से प्रति माह 16 लाख 75 हजार रुपये जीएसटी के रूप में प्राप्त होते हैं. यह सच है कि समग्र वित्तीय स्थिति नाजुक है और नव निर्वाचित पार्षदों को इसे वसूलने के लिए सहयोग करना होगा.
* प्रति माह 26 करोड़ रुपये का खर्च
लेखा विभाग के लेखापरीक्षा आंकड़ों के अनुसार, अमरावती मनपा का मासिक खर्च 26 करोड़ रुपये है. इसमें कर्मचारियों के वेतन पर 18 करोड़ रुपये, बिजली बिल पर 1.50 करोड़ रुपये, ठेके पर रखे गए कर्मचारियों की आपूर्ति पर 2 करोड़ रुपये और स्वच्छता एवं सफाई पर 3 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है.
* टैक्स से लगभग दो करोड़ रुपये प्रति माह
मनपा को संपत्ति कर से औसतन 2 करोड़ रुपये प्रति माह प्राप्त होते हैं. नगर नियोजन विभाग के सहायक निदेशक और बाजार लाइसेंसिंग विभाग की आय भी सीमित है.
* आय के स्त्रोत बढाना होगा
आर्थिक स्थिति लगभग ठीक है. आय के स्रोतों को बढ़ाना होगा. 350 करोड़ रुपये का बकाया है, जिसमें 22 करोड़ रुपये का कर्ज भी शामिल है. निर्वाचित प्रशासन अगले कुछ दिनों में कार्यभार संभालेगा. इसलिए, विकास को जन प्रतिनिधियों और प्रशासन के सहयोग से जोड़ना होगा.
– दत्तात्रेय फिस्के, लेखाधिकारी, मनपा.





