अमरावती की धरती हुई थी बाबासाहेब के पदस्पर्श से पावन

डॉ. पंजाबराव देशमुख के निमंत्रण पर डॉ. आंबेडकर आए थे अमरावती

अमरावती/दि.14- भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135 वीं जयंती निमित्त आज पूरा देश उनकी स्मृति में अभिवादन कर रहा है. ऐसे समय अमरावतीवासियों हेतु अमरावती शहर के साथ जुडी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की दो ऐतिहासिक यादों की स्मृतियां बेहद प्रेरणादायी साबित हो रही है. 13 नवंबर 1927 तथा 4 मई 1936 इन दो तारीखों ने अमरावती के सामाजिक क्रांति के इतिहास में सुवर्णाक्षरों से अपने-आप को दर्ज किया है.

* अंबादेवी सत्याग्रह, समता की पहली आवाज
देश के प्रथम कृषि मंत्री डॉ. पंजाबराव देशमुख ने सन 1927 में डॉ. बाबासाहब आंबेडकर को अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह का नेतृत्व करने हेतु अमरावती में आमंत्रित किया था. जिसे स्वीकार करते हुए डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अमरावती आए थे और उन्होंने 13 नवंबर 1927 को आयोजित ऐतिहासिक सभा व परिषद की अध्यक्षता की थी. उस सभा व परिषद में बॅरि. तिडके, एड. चौबल, एमएलसी गवई, के. बी. देशमुख, डॉ. भोजराजा, डॉ. पटवर्धन, उत्तमराव कदम, मोर्शी के नानासाहेब अमृतकर, जे. वी. नाईक, दत्तात्रय प्रधान व दादर के आर. डी. कवली जैसे दिग्गजों की उपस्थिति थी.

* सन 1936 में हुआ था अभूतपूर्व स्वागत
– रेस्ट हाऊस से नेकालेट पार्क तक की गई थी सजावट
4 मई 1936 को डॉ. बाबासाहब आंबेडकर दूसरी बार अमरावती शहर में आए थे. जिनका स्वागत करने हेतु रेलवे स्टेशन से रेस्ट हाऊस के दौरान हजारों अस्पृश्य बंधु-भगिनी सडक के दोनों ओर खडे थे. रेस्ट हाऊस से नेकालेट पार्क तक पूरे परिसर को रंगीन पताकाओं से सुशोभित किया गया था. उस समय डॉ. बाबासाहब आंबेडकर ने अपनी दूरदृष्टी वाली भावना को व्यक्त करते हुए कहा था कि, डॉ. पंजाबराव देशमुख और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए अथक परिश्रम के चलते यह सत्याग्रह यशस्वी हुआ है, ऐसी जानकारी संत गाडगेबाबा अमरावती विद्यापीठ अंतर्गत डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अध्यासन केंद्र के प्रमुख डॉ. संतोष बनसोड द्वारा दी गई है.

* विद्यार्थियों का प्रेम और एक ऐतिहासिक फोटो
14 नवंबर 1927 को सुबह 7 बजे अमरावती के अस्पृश्य विद्यार्थियों द्वारा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का जंगी सत्कार किया गया था. जिसके तहत उन्हें सम्मानपत्र एवं पान-सुपारी देकर सम्मानित किया गया था. उस समय एक समूह छायाचित्र भी लिया गया था, जो आज अमरावती के इतिहास में एक बहुमूल्य दस्तावेज है.

* दृष्टिक्षेप में इतिहास
– 13 नवंबर 1927 – अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह सभा की अध्यक्षता की.
– 14 नवंबर 1927 – विद्यार्थी वर्ग द्वारा सम्मानपत्र प्रदान व ऐतिहासिक फोटो.
– 4 मई 1936 – भव्य स्वागत एवं नेकालेट पार्क में ऐतिहासिक सभा.

* भाऊसाहब की पहल के चलते महामानव का हुआ था आगमन
अमरावती की पावन भूमि को महामानव डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विचारों एवं पदस्पर्श से और भी अधिक पवित्र करने हेतु शिक्षा महर्षि डॉ. पंजाबराव देशमुख एवं उनके सहयोगियों की पहल बेहद महत्वपूर्ण रही. जिनकी बदौलत अमरावतीवासियों में न केवल डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के विचारों को सुना, बल्कि डॉ. आंबेडकर को प्रत्यक्ष अपनी आंखों से देखा भी.
बॉक्स/फोटो कैप्शन
अंबादेवी मंदिर में सत्याग्रह हेतु 4 मई 1936 को धर्मांतरण के संदर्भ में किया गया डॉ. आंबेडकर का वक्तव्य.

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