अमरावती में वन्यप्राणी-वाहन टकराव रोकने के लिए वैज्ञानिक पहल

रोड आर्ट और वैज्ञानिक तरीकों से दुर्घटनाएं कम करने का प्रयास

* स्थानीय स्वयंसेवकों की अहम भूमिका
अमरावती/ दि.14 – पिछले कुछ वर्षों में अमरावती जिले में सड़कों पर वन्यप्राणी-वाहन टकराव के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. बढ़ती वाहनों की संख्या, सड़कों का विस्तार और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का विभाजन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है. इन दुर्घटनाओं में तेंदुआ , चीतल , काला हिरण और नीलगाय जैसे अनुसूची-1 के संरक्षित वन्यजीवों की मौत हो रही है, जो जैव विविधता के लिए चिंताजनक संकेत है.
विशेषज्ञों के अनुसार ये हादसे मुख्यतः वन्यजीव कॉरिडॉर में होते हैं. ये कॉरिडॉर वन्यजीवों के आवागमन और प्रवास के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग होते हैं. इन क्षेत्रों में तेज रफ्तार वाहनों के कारण जानवरों की गतिविधियां बाधित होती हैं और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है.इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बीगेस्ट कंजर्वेशन ट्रस्ट इंडिया और वाईल्डलाईफ रेस्क्यू फाउंडेशन द्वारा एक अभिनव वैज्ञानिक और जनजागरूकता आधारित पहल शुरू की गई है. इस अभियान में व्यवहार पारिस्थिति की और दृश्य ग्रहण के सिद्धांतों का उपयोग कर सड़कों पर आकर्षक वन्यजीव चित्रकला बनाई जा रही है.ये चित्र विशेष रूप से दुर्घटना संभावित स्थानों पर बनाए जाते हैं, जिससे वाहन चालकों का ध्यान तुरंत आकर्षित होता है. इससे वे स्वाभाविक रूप से अपनी गति धीमी कर देते हैं. सड़क पारिस्थितिकी के अध्ययनों के अनुसार इस प्रकार के दृश्य हस्तक्षेप दुर्घटनाओं को कम करने में प्रभावी सिद्ध हो रहे हैं.इस पहल की खास बात यह है कि इसमें स्थानीय स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी है. स्वयंसेवक रात के समय इन क्षेत्रों का निरीक्षण, मैपिंग और चित्र निर्माण का कार्य करते हैं. यह कम लागत वाला और प्रभावी समाधान वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सहभागिता का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है.इस अभियान को स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों का सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है, जिससे न केवल सड़क सुरक्षा में सुधार हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है.इस पहल में सक्रिय कार्यकर्ता कुणाल दातेऱाव, बबलू बोबडे, अमीन गुडे, जिया बुगदादी, सुमेध गवई, अमित मोतीवाला, मेहुल रायचंद, नरेश पाठाडे, आकाश हरले, प्रसाद वानखेडेमानव और वन्यजीवों के बीच टकराव कम कर सहअस्तित्व स्थापित करने की दिशा में यह पहल एक प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है.

Back to top button