वरिष्ठ महाविद्यालयों के प्राचार्य, संचालक, प्राध्यापकों को प्रशिक्षण अनिवार्य : चंद्रकांत पाटील
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रियान्वयन पर महत्वपूर्ण कदम

* उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग का उपक्रम
मुंबई /दि.17- राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन की दिशा में राज्य में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के ‘ऑनर्स’ व ‘ऑनर्स विथ रिसर्च’ के चौथे वर्ष के कार्यान्वयन के संदर्भ में उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा संचालनालय के संयुक्त विद्यमान से राज्य के सभी वरिष्ठ महाविद्यालयों के प्राचार्य, संचालक, प्राध्यापकों के लिए तीन दिवसीय विशेष ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया है. उसमें सभी संबंधितों की भागीदारी अनिवार्य रहेगी, ऐसे निर्देश उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने दिए हैं.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन में महाराष्ट्र देश में अग्रणी है और शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्य में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम का चौथा वर्ष लागू हो रहा है. इस नए चरण के प्रभावी और समान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है. उच्च शिक्षा प्रणाली में लचीलापन, शोधाभिमुखता और छात्र-केंद्रितता बढ़ाने के लिए यह पुनर्रचना अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कहा.
‘क्रेडिट फ्रेमवर्क’, ‘मल्टिपल एंट्री एंड एग्जिट’ और ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी)’ जैसे तकनीकी पहलुओं का गहन ज्ञान संस्थाप्रमुखों को हो, तथा कार्यान्वयन में कोई त्रुटि न रहे, इसके लिए यह प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है, ऐसा भी मंत्री पाटील ने स्पष्ट किया. उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के शासन निर्णय के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों तथा संलग्न और स्वायत्त महाविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक वर्ष से चौथा वर्ष लागू करने को मंजूरी दी गई है. इस पृष्ठभूमि पर महाविद्यालयों में जागरूकता निर्माण के उद्देश्य से यह चर्चा सत्र आयोजित किया गया था.
चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के ‘ऑनर्स’ व ‘ऑनर्स विथ रिसर्च’ के चौथे वर्ष के इस निर्णय का प्रभावी और सफल कार्यान्वयन होने पर देश के अन्य राज्य भी महाराष्ट्र का आदर्श लेंगे, ऐसा दृढ़ विश्वास मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने व्यक्त किया. राज्य सरकार इस नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए पूरी तरह सकारात्मक और प्रतिबद्ध भूमिका अपनाएगी, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया.
इस नए पाठ्यक्रम के लिए आवश्यक मार्गदर्शक सिद्धांत तैयार करने में महाराष्ट्र राज्य शैक्षणिक व अनुसंधान परिषद का महत्वपूर्ण योगदान है, ऐसा उल्लेख करते हुए मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने महासार्क के अध्यक्ष प्रा. डॉ. रविंद्र कुलकर्णी और उनकी टीम को बधाई दी. चर्चा सत्र में महासार्क के अध्यक्ष तथा मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रा. डॉ. रवींद्र कुलकर्णी ने चौथे वर्ष के पाठ्यक्रम के तकनीकी व प्रशासनिक कार्यान्वयन के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन किया.