टर्बोबॉट-ईएसपी32 आधारित रोबोट पर पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला
96 विद्यार्थियों ने सीखा रोबोटिक्स, एम्बेडेड सिस्टम और आईओटी का व्यावहारिक उपयोग

अमरावती/दि.10– जीएच रायसोनी विश्वविद्यालय, अमरावती के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईएक्सटीसी) विभाग की ओर से टर्बोबॉट-ईएसपी32 आधारित रोबोट विकसित करने पर पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला में 96 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और रोबोटिक्स, एम्बेडेड सिस्टम तथा ईएसपी32 आधारित रोबोटिक अनुप्रयोगों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया.
कार्यशाला का शुभारंभ 8 अगस्त को उद्घाटन समारोह के साथ हुआ. विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. विनायक देशपांडे ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए विद्यार्थियों को उभरती प्रौद्योगिकियों का सक्रिय रूप से अध्ययन करने तथा हैंड्स-ऑन लर्निंग के माध्यम से व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया. छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. प्रशांत अवचट ने विद्यार्थियों से कार्यशाला का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया. उन्होंने तकनीकी चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया. ईएक्सटीसी विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीकांत चवाटे ने कार्यशाला के उद्देश्यों और उपयोगिता की जानकारी दी. उन्होंने एम्बेडेड सिस्टम, रोबोटिक्स और आईओटी आधारित अनुप्रयोगों की तकनीकी समझ विकसित करने में प्रायोगिक शिक्षा की भूमिका पर प्रकाश डाला. इस अवसर पर डॉ. अमित गायकवाड़ तथा विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. स्नेहिल जायसवाल भी उपस्थित रहे. विभाग के डॉ. राजश्री वानखेडे, प्रो. रूपाली चोपड़े, प्रो. वीना चौधरी, प्रो. यशश्री सोनारे, डॉ. सचिन मेश्राम और डॉ. नितिन मांडवगडे ने भी आयोजन में सहयोग किया.
कार्यशाला में विद्यार्थियों को ईएसपी32 माइक्रोकंट्रोलर प्रोग्रामिंग, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर इंटरफेसिंग, मोटर कंट्रोल, सेंसर इंटीग्रेशन, सर्किट कनेक्शन, रोबोट प्रोग्रामिंग, रोबोटिक मूवमेंट और ट्रबलशूटिंग जैसे विषयों का प्रशिक्षण दिया गया. ‘लर्निंग बाय डूइंग’ पद्धति के तहत विद्यार्थियों ने स्वयं रोबोटिक सिस्टम को असेंबल किया, उसकी प्रोग्रामिंग की और टेस्टिंग के साथ तकनीकी समस्याओं का समाधान भी किया. इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों की एम्बेडेड प्रोग्रामिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, रोबोटिक्स, समस्या समाधान और सिस्टम इंटीग्रेशन संबंधी क्षमताओं को मजबूती मिली. ईएक्सटीसी विभाग के विद्यार्थी प्रथमेश सपाटे, श्रेयस पचाड़े और वंश धोबले ने तकनीकी निष्पादन, प्रदर्शन और हैंड्स-ऑन गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
96 विद्यार्थियों की भागीदारी ने उभरती तकनीकों और व्यावहारिक इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के प्रति छात्रों की रुचि को प्रदर्शित किया. कार्यशाला ने इलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम, रोबोटिक्स और आईओटी के एकीकरण के जरिए नवीन तकनीकी समाधान विकसित करने की दिशा में विद्यार्थियों को प्रभावी मंच प्रदान किया. विभाग ने कार्यशाला की सफलता के लिए कुलपति, छात्र कल्याण अधिष्ठाता, कुलसचिव, विश्वविद्यालय प्रशासन, विभाग प्रमुखों, संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया. पांच दिवसीय यह कार्यशाला अनुभवात्मक शिक्षा, नवाचार, तकनीकी कौशल विकास और परियोजना आधारित अध्ययन को बढ़ावा देने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही.





