अमरावती में किसकी सरपरस्ती में चल रहे ऑर्केस्ट्रा बार?

आबकारी विभाग के पास रिकॉर्ड नहीं, फिर भी देर रात तक सजती हैं महफिलें!

* सरकार ने ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस पर लगाया ब्रेक, अब अमरावती में कथित ‘लाइव शो’ पर उठे बड़े सवाल
* प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल
अमरावती/दि.29 – महाराष्ट्र सरकार ने राज्यभर में ऑर्केस्ट्रा बार और लाइव म्यूजिक कार्यक्रमों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए नए ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस जारी करने तथा पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण पर रोक लगा दी है. सरकार का तर्क है कि कुछ स्थानों पर ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का इस्तेमाल कानून के प्रावधानों को दरकिनार करने के लिए किया जा रहा था. सरकार के इस फैसले के बाद अमरावती में वर्षों से चल रही एक चर्चा अचानक सुर्खियों में आ गई र्हैें जब शहर में किसी भी बार या परमिट रूम को ऑर्केस्ट्रा संचालन की अनुमति दिए जाने का रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है, तो फिर कुछ प्रतिष्ठानों में कथित रूप से चल रहे लाइव ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम आखिर किसकी शह पर संचालित हो रहे हैं?
अमरावती में ऑर्केस्ट्रा बारों को लेकर उठे सवाल अब केवल मनोरंजन व्यवसाय तक सीमित नहीं रह गए हैं. यह प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के पालन और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है. मामला प्रशासनिक जवाबदेही, कानून के पालन और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ गया है. सरकार ने राज्य स्तर पर शिकंजा कस दिया है, लेकिन शहर में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कुछ बार और परमिट रूमों में नियमित रूप से लाइव ऑर्केस्ट्रा, म्यूजिकल नाइट और कलाकारों की प्रस्तुतियां आयोजित होती हैं. इनमें से कई प्रतिष्ठान रिहायशी इलाकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित बताए जाते हैं, जहां देर रात तक चलने वाले कार्यक्रमों को लेकर नागरिकों की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं.अमरावती में अब भी सबसे बड़ा सवाल कायम है, जब लाइसेंस का रिकॉर्ड ही नहीं, तो आखिर किसकी शह पर देर रात तक सज रही हैं ये महफिलें?
* सरकार ने आखिर क्यों कसा शिकंजा?
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि अब महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत नए ‘लाइव म्यूजिक परफॉर्मेंस (ऑर्केस्ट्रा)’ लाइसेंस जारी नहीं किए जाएंगे और मौजूदा लाइसेंसों का नवीनीकरण भी नहीं होगा. सरकार का कहना है कि कुछ स्थानों पर ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का उपयोग डांस बार संबंधी प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जा रहा था. इसी वजह से लाइसेंस व्यवस्था को अधिक कड़े कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाया गया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी विधानसभा में स्पष्ट कर चुके हैं कि नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले ऑर्केस्ट्रा बारों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द किए जा सकते हैं और सरकार इस विषय पर पहले से सख्त रुख अपना चुकी है.
* रिकॉर्ड में नहीं, लेकिन जमीन पर सब कुछ मौजूद?
सूत्रों के अनुसार अमरावती शहर के कुछ प्रमुख बार और परमिट रूमों में लंबे समय से लाइव ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इनमें से कई प्रतिष्ठान घनी आबादी और रिहायशी क्षेत्रों में स्थित बताए जाते हैं. स्थानीय नागरिकों द्वारा समय-समय पर देर रात तक तेज आवाज में संगीत और कार्यक्रमों को लेकर शिकायतें भी की जाती रही हैं. हैरानी की बात यह है कि आबकारी विभाग के पास न तो ऐसे किसी लाइसेंस का रिकॉर्ड है और न ही विभाग यह स्वीकार करता है कि किसी बार को ऑर्केस्ट्रा संचालन की अनुमति दी गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि अनुमति नहीं है तो ये कार्यक्रम कैसे चल रहे हैं? और यदि चल रहे हैं तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? यहीं से पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू सामने आता है. राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के सूत्रों के अनुसार अमरावती जिले में ऐसे किसी बार या परमिट रूम को ऑर्केस्ट्रा संचालन की अनुमति दिए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. यदि विभागीय अभिलेखों में लाइसेंस नहीं हैं, तो फिर शहर के कुछ प्रतिष्ठानों में कथित रूप से आयोजित होने वाले लाइव कार्यक्रम किस अनुमति के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं? क्या इन कार्यक्रमों के लिए किसी अन्य विभाग से अनुमति ली गई है? यदि ली गई है, तो उसकी प्रकृति क्या है? क्या पुलिस, स्थानीय प्रशासन या नगर निगम के पास इसकी जानकारी है? क्या सभी आवश्यक नियमों और शर्तों का पालन किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी भी विभाग के पास स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता.
* रिहायशी इलाकों में बढ़ रहा असंतोष
शहर के कई नागरिकों का कहना है कि मनोरंजन कार्यक्रमों के नाम पर देर रात तक चलने वाली गतिविधियों से शोर-प्रदूषण बढ़ता है और आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानी होती है. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि यदि किसी प्रतिष्ठान को कानूनी अनुमति प्राप्त नहीं है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और यदि अनुमति है तो प्रशासन को पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां बार और परमिट रूम के आसपास आवासीय बस्तियां हैं, वहां नागरिक लंबे समय से सख्त निगरानी और नियमों के पालन की मांग करते रहे हैं.
* किसकी निगरानी में चल रहे हैं कार्यक्रम?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रश्न प्रशासनिक निगरानी को लेकर उठ रहा है. यदि वास्तव में बिना वैध लाइसेंस या स्पष्ट अनुमति के कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, तो संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या यह किसी प्रकार की प्रशासनिक उदासीनता है या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण का परिणाम? बड़ा सवाल है, जब राज्य उत्पाद शुल्क (आबकारी) विभाग के पास किसी भी बार या परमिट रूम को ऑर्केस्ट्रा संचालन की अनुमति दिए जाने का रिकॉर्ड ही नहीं है, तो फिर शहर के कुछ बड़े और चर्चित बारों में कथित रूप से चल रहे लाइव ऑर्केस्ट्रा आखिर किसकी शह पर संचालित हो रहे हैं? शहर में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि सरकार के आदेश के बाद व्यापक जांच शुरू होती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं.
* सरकार का फैसला और अमरावती की हकीकत
राज्य सरकार ने हाल ही में महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम और महिलाओं की गरिमा से जुड़े प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस व्यवस्था पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. गृह विभाग के अनुसार कुछ स्थानों पर ऑर्केस्ट्रा लाइसेंस का उपयोग प्रतिबंधित गतिविधियों के विकल्प के रूप में किया जा रहा था. इसी कारण नए लाइसेंस बंद करने और पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण रोकने का फैसला लिया गया. लेकिन अमरावती में मामला और भी पेचीदा दिखाई देता है. यहां यदि लाइसेंस हैं ही नहीं, तो सरकार की नई नीति के बाद प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि कथित तौर पर चल रहे ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम किस कानूनी आधार पर संचालित हो रहे थे.
* जांच अभियान चला तो खुल सकते हैं कई राज
गृह विभाग के हालिया आदेश के बाद राज्यभर में ऑर्केस्ट्रा और लाइव म्यूजिक कार्यक्रमों पर निगरानी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. ऐसे में अमरावती में भी पुलिस, आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त जांच अभियान चलाए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. यदि ऐसी जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि शहर में कितने प्रतिष्ठानों में लाइव कार्यक्रम आयोजित होते हैं, उनके पास कौन-कौन सी अनुमतियां हैं, और क्या वे सभी कानूनी मानकों का पालन कर रहे हैं. जांच से प्रशासनिक खामियां, लाइसेंसिंग व्यवस्था की वास्तविक स्थिति और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता भी उजागर हो सकती है.

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