चर्चित दीपाली चव्हाण आत्महत्या मामले में विनोद शिवकुमार बरी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों पर केस किया रद्द

अमरावती/दि.19- बहुचर्चित मेलघाट टाइगर रिजर्व की हरिसाल की तत्कालीन वन अधिकारी दीपाली चव्हाण की आत्महत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी उपवन संरक्षण विनोद शिवकुमार के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी का केवल गुस्सैल या सख्त व्यवहार अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं माना जा सकता.
दीपाली चव्हाण ने 25 मार्च 2021 को अपने सरकारी आवास में अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या से पहले उन्होंने मेलघाट व्याघ्र प्रकल्प के क्षेत्र संचालक तथा वर्तमान में प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) एम. श्रीनिवास रेड्डी, अपनी मां और पति के नाम पत्र लिखे थे. इन पत्रों में उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जा रहे कथित उत्पीड़न का उल्लेख किया था. घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र में वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ आक्रोश फैल गया था. विभिन्न सामाजिक संगठनों ने आंदोलन किए. इसके बाद विनोद शिवकुमार और एम. श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों को निलंबित किया गया था. बाद में मुंबई उच्च न्यायालय ने रेड्डी के खिलाफ मामला रद्द कर दिया था, जबकि शिवकुमार की याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके बाद शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शिवकुमार की याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ मामला रद्द कर दिया. अदालत ने मामले में घटनाओं और आत्महत्या के बीच प्रत्यक्ष एवं निकट संबंध के पहलू पर भी विचार किया.
* ‘यह इंसाफ और इंसानियत की हार है’
सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा सबाने ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निराशा व्यक्त की. उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट समेत कई सबूत मौजूद होने और अनेक लोगों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के कथित उत्पीड़न की बात सामने रखे जाने के बावजूद दीपाली को न्याय नहीं मिलना निराशाजनक है. उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए, लेकिन इस निर्णय का स्वागत करना उनके लिए मुश्किल है.

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