मराठी भाषा के लिए कानून क्या कहता है?
महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस विशेष

* व्यवहार में उपयोग बढ़ाना हर नागरिक की भी जिम्मेदारी
मुंबई /दि.1– शासकीय कामकाज, शिक्षा, उद्योग-व्यापार और सार्वजनिक जीवन में मराठी का उपयोग अधिक से अधिक प्रभावी हो, इसके लिए राज्य सरकार ने समय-समय पर कई कानून, नियम और आदेश जारी किए हैं; लेकिन फिर भी सार्वजनिक व्यवहारों में और दैनिक कामकाज में मराठी का उपयोग प्रभावी रूप से होने में सीमित सफलता ही मिली है. शासकीय स्तर पर भी मराठी की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बहुत अधिक प्रयास होते नहीं दिखते.
‘दिल्ली का भी तख्त रखता है, महाराष्ट्र मेरा’ यह महाराष्ट्र की ऐतिहासिक पहचान और महत्व है और ऐसे इस राज्य की ‘मराठी’ राजभाषा है. ‘अमृत से भी बाजी जीतने वाली’ इस प्रसिद्ध मायमराठी मराठी ने संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, नामदेव सहित अनेक संतों की अमर रचनाओं से और अधिक समृद्धि प्राप्त की है. कविवर्य कुसुमाग्रज, ग. दि. माडगूळकर, वरिष्ठ कवि ग्रेस, मंगेश पाडगांवकर, बा. सी. मर्ढेकर जैसे दिग्गजों ने मराठी की प्रतिष्ठा बढ़ाई है.
मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा भी केंद्र सरकार ने दो वर्ष पहले दिया है. मराठी की प्रतिष्ठा बड़ी होने के बावजूद मुंबई, ठाणे जैसे कुछ शहरों में नागरिकों के दैनिक व्यवहार में मराठी का महत्व कम होता जा रहा है. अंग्रेजी देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यवहार की भाषा होने के कारण अभिभावकों का झुकाव भी बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने की ओर है. इसलिए मराठी स्कूलों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम हो रही है और अंग्रेजी शिक्षा की ओर बच्चों का झुकाव बढ़ रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों में बसे मराठी लोगों ने वर्षों से मराठी परंपरा, त्योहार और भाषा संरक्षण को बनाए रखा है.
आज के वैश्वीकरण के युग में अंग्रेजी और अन्य भाषाओं का महत्व नकारा नहीं जा सकता. लेकिन साथ ही अपनी मातृभाषा का सम्मान बनाए रखना और उसका व्यवहार में उपयोग बढ़ाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. मराठी भाषा को उसका गौरव पुनः प्राप्त हो, वह अधिक समृद्ध बने, महाराष्ट्र में केवल शासकीय कामकाज में नहीं बल्कि सभी के दैनिक व्यवहार और कामकाज में मराठी का उपयोग हो, ऐसी अपेक्षा है और इसके लिए मराठी जनता का सहयोग आवश्यक है.
सरकार ने मराठी भाषा नीति घोषित की है और उसकी कई सिफारिशों को लागू करने के लिए कदम उठाए हैं. मराठी भाषा विश्वविद्यालय अमरावती जिले के रिद्धपुर में शुरू किया गया है. मराठी माध्यम से शिक्षा लेकर डिग्री और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई करना तथा ‘आईएएस’, ‘आईपीएस’ जैसी परीक्षाएं देना भी अब संभव है; लेकिन इसमें अपेक्षाकृत कम प्रतिसाद मिलता है. केवल मराठी गीत सुनना, कार्यक्रम देखना, मराठी त्योहार मनाना ही मराठी प्रेम तक सीमित न रखते हुए बच्चों पर भी मराठी भाषा के संस्कार देना मराठी को बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
* शासकीय कामकाज मराठी में अनिवार्य
मराठी भाषा को राजभाषा का दर्जा देने वाला महाराष्ट्र राजभाषा अधिनियम, 1964 (1 मई 1966 से लागू) मूल कानून है. संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा हिंदी है और कार्य के लिए अंग्रेजी के उपयोग की भी अनुमति है, जबकि अनुच्छेद 345 के अनुसार राज्यों को अपनी आधिकारिक भाषा तय करने का अधिकार है. विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा देने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 350(ए) में किया गया है. इन्हीं प्रावधानों का उपयोग कर राज्य सरकार ने यह कानून लागू किया और मराठी राजभाषा बनी. केंद्र सरकार और अन्य राज्यों से संवाद के लिए हिंदी और अंग्रेजी के उपयोग की अनुमति है. शासकीय कामकाज में मराठी का उपयोग करना तथा सरकारी निर्णय, आदेश, परिपत्र, अधिसूचना, सेवाएं, वेबसाइट, पत्राचार आदि सभी मराठी में होना अनिवार्य है. मंत्रालय, जिला और पुलिस प्रशासन सहित सभी शासकीय, अर्ध-शासकीय और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में कर्मचारियों द्वारा मराठी का उपयोग करना आवश्यक है और इसका पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी है.
* राज्य सरकार की मराठी भाषा नीति – 2015
मराठी भाषा नीति तय करने के लिए साहित्यकार और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी लक्ष्मीकांत देशमुख की अध्यक्षता में 2011 में समिति गठित की गई थी, जिसने 2013 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. इसी के आधार पर सरकार ने 2015 में मराठी भाषा नीति घोषित की. शिक्षा, प्रशासन, न्याय व्यवस्था और तकनीक में मराठी के उपयोग को बढ़ाना, मराठी साहित्य, शोध और अनुवाद को प्रोत्साहन देना तथा मराठी भाषा के विकास के लिए प्रयास करना इस नीति का उद्देश्य है.
* दुकानों और प्रतिष्ठानों के बोर्ड मराठी में अनिवार्य
दुकानें, होटल, मॉल, सिनेमा हॉल आदि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के बोर्ड मराठी में होने चाहिए. यह कानूनी प्रावधान महाराष्ट्र दुकाने एवं प्रतिष्ठान अधिनियम 2017 के तहत किया गया है. इसका पालन न करने पर दंड का प्रावधान है. इन प्रतिष्ठानों को ग्राहकों को दर सूची, सेवाएं और अन्य विवरण मराठी में देना आवश्यक है. नियम का पालन न करने पर दो से पांच हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
* सभी बोर्ड के स्कूलों में मराठी पढ़ाना अनिवार्य
‘महाराष्ट्र अनिवार्य मराठी शिक्षा अधिनियम, 2020’ के तहत सीबीएसई, आईसीएसई सहित सभी बोर्डों के अंग्रेजी माध्यम के गैर-सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक मराठी भाषा पढ़ाना अनिवार्य किया गया है. विद्यार्थियों को मराठी में पढ़ना, लिखना और संवाद करना आना चाहिए, यही इस कानून का उद्देश्य है. मराठी पढ़ाने में लापरवाही करने पर स्कूलों पर जुर्माना या मान्यता रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है.




