पति ने पत्नी से वेतन मांगा तो पत्नी ने की शिकायत

आखिर कोर्ट ने कहा, यह कोई क्रूरता नहीं

नागपुर/दि.21 – विवाहित जोड़े में यदि पत्नी कमाने वाली है और पति ने उससे घर के खर्च के लिए पैसे मांगे, तो इसे कानून के तहत क्रूरता या उत्पीड़न नहीं माना जा सकता, ऐसा एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने दिया है. इसके साथ ही अदालत ने पति, सास और ससुर के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न का मामला और आपराधिक केस पूरी तरह रद्द करने के आदेश दिए हैं. न्यायाधीशों की खंडपीठ ने यह फैसला दिया, जिससे यह निर्णय वैवाहिक विवाद मामलों में कानूनी दिशा देने वाला साबित हुआ है.
* पत्नी उच्चशिक्षित और बडे पद पर
इस मामले में संबंधित दंपति का कुछ वर्ष पहले प्रेम विवाह हुआ था. पत्नी उच्च शिक्षित थी और एक अच्छे पद पर नौकरी कर रही थी. पत्नी के अनुसार, नौकरी करने के कारण उसे घर के कामों से छूट चाहिए थी, लेकिन ससुराल पक्ष इसका विरोध कर रहा था. उसे घर का काम न करने पर अपना वेतन पति को देने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था. पत्नी ने आरोप लगाया कि पति और ससुराल वालों द्वारा पैसे की मांग करना आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न है, जिसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
* मानकापुर थाने में एफआईआर
इस शिकायत के आधार पर नागपुर के मानकापुर पुलिस ने पति और सास-ससुर के खिलाफ दहेज निषेध कानून और उत्पीड़न की धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी. पुलिस ने जांच पूरी कर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोप पत्र भी दाखिल किया था.
* ससुराल पक्ष का तर्क
पति और उसके माता-पिता ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी. उनके वकील ने तर्क दिया कि पति-पत्नी दोनों की आय का उपयोग घर के खर्च के लिए करना सामान्य बात है. पति द्वारा पत्नी से घर के खर्च में मदद मांगना या वेतन मांगना दहेज की मांग या क्रूरता नहीं कहा जा सकता. केवल वैवाहिक मतभेदों के आधार पर पूरे परिवार को आपराधिक मामले में फंसाना गलत है.
इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर मामले का अध्ययन किया. अदालत ने कहा कि पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों से यह साबित नहीं होता कि किसी प्रकार की शारीरिक या गंभीर मानसिक क्रूरता हुई है. छोटे-मोटे घरेलू विवादों को आपराधिक उत्पीड़न नहीं माना जा सकता. आज के समय में जब दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो घर का खर्च आपसी सहमति से चलना चाहिए. अंत में हाईकोर्ट ने मानकापुर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित पूरा केस रद्द कर दिया. इससे पति और उसके बुजुर्ग माता-पिता को बड़ी राहत मिली. इस फैसले ने वैवाहिक विवादों में दहेज उत्पीड़न कानून के दुरुपयोग और कामकाजी दंपतियों की जिम्मेदारियों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की है.

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