महाराष्ट्र में लागू होगी ‘जीरो रॉयल्टी’ नीति
राजस्व मंत्री बावनकुले की घोषणा, रेती संकट से राहत की तैयारी

मुंबई/दि.2- महाराष्ट्र सरकार ने निर्माण कार्यों को गति देने और रेत की कमी दूर करने के लिए बड़ा निर्णय लेने की घोषणा की है. राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधान परिषद में कहा कि अन्य राज्यों से महाराष्ट्र में लाई जाने वाली रेत पर ‘जीरो रॉयल्टी’ नीति लागू की जाएगी. इस संबंध में नीति की घोषणा चालू मानसून सत्र समाप्त होने से पहले किए जाने की संभावना है.
विधान परिषद में विधायक चंद्रकांत रघुवंशी द्वारा नंदुरबार जिले में रेत की कमी तथा गुजरात से आने वाली रेत के मुद्दे पर उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए मंत्री बावनकुले ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास और निर्माण कार्यों के लिए समय पर पर्याप्त मात्रा में रेत उपलब्ध कराना है, ताकि विभिन्न परियोजनाओं में विलंब न हो.
* अवैध रेत परिवहन रोकने के लिए ऑनलाइन निगरानी
राजस्व मंत्री ने बताया कि रेत और अन्य गौण खनिजों की अवैध ढुलाई तथा खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार की कंपनी रेलटेल के सहयोग से अत्याधुनिक ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित की गई है. इसके अलावा कोकण विभागीय आयुक्त कार्यालय में राज्यस्तरीय ‘वॉर रूम’ भी स्थापित किया गया है, जहां से पूरे राज्य में खनिज परिवहन और खनन गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है.
* तापी नदी में रेत का बड़ा भंडार, लेकिन तकनीकी बाधा
मंत्री बावनकुले ने कहा कि नंदुरबार जिले से होकर बहने वाली तापी नदी में रेत का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. हालांकि नदी में वर्षभर पानी रहने के कारण पारंपरिक पद्धति से रेत निकालना संभव नहीं हो पाता. इसके चलते जिले में रेत की कृत्रिम कमी पैदा हो रही है और कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य गुजरात में सक्शन पंप तकनीक का उपयोग कर वर्षभर रेत निकाली जाती है, जबकि महाराष्ट्र में ऐसी अनुमति नहीं है. इसी वजह से स्थानीय स्तर पर रेत की उपलब्धता सीमित हो जाती है. सरकार अब कोकण क्षेत्र में लागू मॉडल की तर्ज पर नंदुरबार जिले के लिए विशेष प्रस्ताव तैयार कर रही है. प्रस्ताव के तहत पर्यावरण विभाग द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर सक्शन पंप के माध्यम से रेत निकासी की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है. इससे स्थानीय स्तर पर रेत उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है. जब तक स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रेत उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक गुजरात और अन्य राज्यों से रेत आयात करने की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए संबंधित राज्य के जिलाधिकारी द्वारा रेत उपलब्ध होने का प्रमाण-पत्र या प्रस्ताव देना अनिवार्य होगा. इसके बाद दोनों राज्यों के जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित कर नंदुरबार जिले को आवश्यक मात्रा में रेत उपलब्ध कराई जाएगी.
* ‘जीरो रॉयल्टी’ पर मिलेगी रेत
राजस्व मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि अन्य राज्यों से लाई जाने वाली रेत पर रॉयल्टी नहीं ली जाएगी. अर्थात रेत ‘जीरो रॉयल्टी’ के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे निर्माण लागत कम होने और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है. हालांकि रेत परिवहन को लेकर कुछ शर्तें भी लागू रहेंगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेत की ढुलाई केवल दिन के समय ही की जा सकेगी. रात के समय रेत परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा, जिससे अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके.
* निर्माण क्षेत्र को मिलेगा लाभ
सरकार की इस घोषणा को निर्माण क्षेत्र, ठेकेदारों और विकास कार्यों से जुड़े विभागों के लिए राहतभरी खबर माना जा रहा है. विशेष रूप से नंदुरबार और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से रेत की कमी के कारण कई निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे. नई नीति लागू होने के बाद रेत की उपलब्धता बढ़ने और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है.