महाराष्ट्र के 20 फीसद गांवों में श्मशान घाट नहीं

सरकार का बड़ा फैसला, अब प्रमाणपत्र के बिना विकास कार्यों का फंड नहीं मिलेगा

मुंबई/दि.8 – महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी हजारों गांव ऐसे हैं, जहां अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक उपलब्ध नहीं है. इस गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अब गांव में श्मशान घाट होने का प्रमाणपत्र दिए बिना जनप्रतिनिधियों को अन्य विकास कार्यों के लिए सरकारी निधि जारी नहीं की जाएगी.
विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर हुई चर्चा के दौरान ग्राम विकास मंत्री जयकुमार गोरे ने बताया कि राज्य के 7 हजार 444 गांवों (करीब 20 प्रतिशत) में आज भी श्मशान घाट नहीं है. ऐसे में बरसात के दिनों में लोगों को पानी से होकर या खुले स्थानों पर अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. मंत्री ने कहा कि गांव वहां श्मशान घाट की नीति पर सरकार काम कर रही है और इसके लिए उनके अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है. अब विधायक निधि, जिला नियोजन समिति और 25-15 योजना के तहत विकास कार्यों के लिए धन तभी मंजूर होगा, जब संबंधित गांव में श्मशान घाट होने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाएगा. इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है और उसका पालन शुरू हो चुका है.
चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार से मांग की कि जिला नियोजन समिति के बजट का 3 प्रतिशत हिस्सा श्मशान घाटों के विकास के लिए आरक्षित किया जाए. उन्होंने कहा, जीवन सुखद नहीं है, कम से कम मृत्यु तो सम्मानजनक होनी चाहिए. इस पर मंत्री जयकुमार गोरे ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीपीसी से 3 प्रतिशत निधि देने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी. साथ ही श्मशान घाट के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराने के संबंध में के साथ बैठक कर जल्द निर्णय लिया जाएगा. जहां सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होगी, वहां विशेष योजना के तहत जमीन उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जाएगा.
इस दौरान भाजपा विधायक अतुल भोसले ने अपने क्षेत्र के जोयवाड़ी गांव में श्मशान घाट नहीं होने का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार ने शीघ्र आवश्यक निधि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. चर्चा में यह भी सामने आया कि जिन गांवों में श्मशान घाट हैं, वहां भी अधिकांश की हालत बेहद खराब है. कई स्थानों पर छतें टूट चुकी हैं, बारिश में अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाता है और कुछ जगहों पर श्मशान घाट असामाजिक तत्वों और शराबियों का अड्डा बन चुके हैं. सरकार के इस नए फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में इस समस्या के समाधान की उम्मीद जताई जा रही है.

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