प्रशासक राज की मानसिकता से बाहर नहीं आ पा रहा मनपा प्रशासन

निर्वाचित जनप्रतिनिधियों व सदन की अनदेखी कर लिए जा रहे निर्णय

* मनमाने तरीके से फॉगिंग व ब्लिचिंग के लिए जारी किया गया 44 लाख रूपयों का ठेका
* स्वच्छता अभ्यास समिती ने इस काम का जिम्मा ‘कोणार्क’ को ही दिए जाने की सिफारिश की थी
* बारिश का मौसम शुरू होने के बाद डेंग्यू व मलेरिया की रोकथाम को लेकर मनपा की नींद खुली
अमरावती/दि.8 – इस समय जहां विगत कुछ समय से शहर में साफसफाई व कचरा संकलन के कामों हेतु कोणार्क कंपनी को दिए गए एकल व संयुक्त ठेके को लेकर अच्छा खासा हंगामा मचा हुआ है. साथ ही कोणार्क कंपनी को प्रशासक राज के दौरान जल्दबाजी में करोडों रूपयों का ठेका दिए जाने के लिए मनपा प्रशासन के नियमों व शर्तो की अनदेखी करते हुए मनमाने ढंग से काम किए जाने का जमकर आरोप भी लगा था. लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन कोई सबक लेने तथा प्रशासक राज की मानसिकता से बाहर आने के लिए तैयार नहीं है. इसका जीता जागता उदाहरण अब शहर में फॉगिंग व ब्लिचिंग के लिए मनपा प्रशासन द्वारा जारी की गई 44.76 लाख रूपयों की निविदा को कहा जा सकता है.
बता दे कि, इससे पहले हमेशा ही मनपा द्वारा साफसफाई केे कामों को लेकर जारी की जानेवाली निविदा प्रक्रिया की शर्तों में फॉगिंग व ब्लिचिंग के कामों का भी समावेश रहा करता था. परंतु इस बार कोणार्क कंपनी को पूरे शहर की साफसफाई करते हुए कचरा संकलित करने और कचरे की ढुलाई कर उसे कंपोस्ट डिपो तक पहुंचाने हेतु दिए गए करीब 340 करोड रूपयोें के एकल व संयुक्त ठेके में फॉगिंग व ब्लिचिंग कामों का समावेश ही नहीं किया गया. खास बात यह रही कि कोणार्क कंपनी द्वारा लचर ढंग से किए जा रहे कामकाज को लेकर मनपा की विशेष आमसभा में मचे हंगामे केवल जमिनी स्थिती व हकिकत का आकलन करने हेतु सर्वदलिय स्वच्छता अध्ययन समिती का गठन किया गया था और इस समिती ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा था कि साफसफाई के काम हेतु प्रकाशित निविदा सुचना तथा मनपा प्रशासन व कोणार्क कंपनी के बिच हुए ठेका करार के नियमों व शर्तों में काफी अधिक फर्क है तथा करारनामे में निविदा सुचना की कई शर्तों का समावेश ही नहीं किया गया. संभवतः ऐसा ठेकाधारक को लाभ पहुंचाने हेतु जानबुझकर किया गया होगा. इस निष्कर्ष पर पहुंचने के साथ ही अभ्यास समिती ने मनपा की आमसभा में यह सिफारिश भी की थी कि कोणार्क कंपनी के साथ किए गए करारनामे के नियमों व शर्तों में संशोधन करते हुए कोणार्क कंपनी को ही शहर भर में फॉगिंग व ब्लिचिंग के काम को जिम्मा सौंपा जाए. समिती द्वारा अपनी रिपोर्ट विगत अप्रैल माह के दौरान हुई आमसभा में सौंपी गई थी. जिसे अब करीब दो माह का समय हो चुका है. परंतु इतने समय के दौरान मनपा प्रशासन द्वारा इस संदर्भ में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, बल्कि अब जब मानसून सक्रिय होकर बारिश का मौसम शुरू हो गया, तो मनपा प्रशासन की निंद खुली है और मनपा प्रशासन ने हडबडाकर होश में आते हुए शहर में फॉगिंग व ब्लिचिंग के काम हेतु 44.76 लाख रूपये की लागत वाली नई व स्वतंत्र निविदा जारी की है.
उपरोक्त पूरे मामले को देखते हुए कहा जा सकता है कि, मनपा प्रशासन को न तो जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों की कोई फिक्र है और न ही जनता के गाढे पसिने की कमाई से मनपा की तिजोरी में जमा होनेवाले पैसोंके खर्च को लेकर कोई गंभीरता ही है. यही वजह है कि जहां एक ओर मनपा की आमसभा में कोणार्क कंपनी के तीन माह के देयकों का भुगतान रोके जाने का निर्णय होने के बावजूद मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी के देयकों का भुगतान कर दिया गया. वहीं दूसरी ओर स्वच्छता समिती द्वारा कोणार्क कंपनी को ही फॉगिंग व ब्लिचिंग के कामों का जिम्मा सौंपे जाने की सिफारिश किए जाने के बावजूद मनपा प्रशासन ने इस काम के लिए करीब 45 लाख रूपये की लागत वाली स्वतंत्र निविदा जारी कर दी है. जिसके चलते कहा जा सकता है कि या तो मनपा के सत्तापक्ष की मनपा प्रशासन पर कोई पकड नहीं है, या फिर प्रशासक राज की मानसिकता से मनपा प्रशासन के अधिकारी अब तक बाहर नहीं आ पाए है.

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* हमने तो कोणार्क को ही फॉगिंग व ब्लिचिंग का जिम्मा देने कहा था
स्वच्छता अध्ययन समिती के अध्यक्ष रह चुके मनपा के सभागृह नेता व पूर्व महापौर चेतन गावंडे से जब इस पूरे मामले को लेकर जानकारी व प्रतिक्रिया हेतु संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि, स्वच्छता समिती ने कोणार्क कंपनी को दिए गए ठेके में ही फॉगिंग व ब्लिचिंग के कामों का समावेश करने की सिफारिश की थी. इस बात को करीब दो माह का समय हो चुका है. ऐसे में समिती की सिफारिशों को अनदेखा करते हुए मनपा प्रशासन द्वारा फॉगिंग व ब्लिचिंग के काम हेतु स्वतंत्र निविदा जारी करना समझ से परे है. इस विषय को लेकर आगामी आमसभा में मनपा प्रशासन से जवाब तलब किया जाएगा.

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