संभाग के 9 बडे प्रकल्पों में 60 प्रतिशत जलसंग्रह

बारिश के घाटे की वजह से हालात बुरे

* मध्यम प्रकल्पों में भी तुलना में कम पानी
अमरावती /दि.19- लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण पश्चिम विदर्भ के जलाशय सूखे-सूखे लग रहे हैं. अमरावती संभाग के 9 बडे सिंचाई प्रकल्पों में इस बार सितंबर आधे से अधिक बीतने के बाद भी मात्र 60 प्रतिशत पानी दिखाई पड रहा है. जबकि इसी दौरान पिछले वर्ष जलसंग्रह की यह मात्रा 93 प्रतिशत से अधिक रही थी. बता दें कि, संभाग के चार प्रमुख जिलों अमरावती, अकोला, यवतमाल, वाशिम में बारिश का 30-40 प्रतिशत लॉस दर्ज किया गया है. लौटते मानसून की बरसात की संभावना भी क्षीण बताई जा रही है. ऐसे में पश्चिम विदर्भ के पीने के पानी की भी समस्या बडी हो सकती हैं.
जलाशयों में पानी कम होने से सिंचाई की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है. रबी सीजन में वह मुश्कील सामने आने की आशंका जताने के साथ विभाग के अधिकारियों एवं जानकारों ने बताया कि, गर्मी के दिनों में जलसंकट गहरा सकता है. संभाग के 9 बडे प्रकल्पों की कुल क्षमता 1399.92 लाख क्यूबीक मीटर है. वहां 843 लाख क्यूबीक मीटर पानी अभी जमा है. अप्पर वर्धा बांध के नल-दमयंती जलाशय में पिछले साल के 97 प्रतिशत की तुलना में इस वर्ष 58.66 प्रतिशत पानी रहने की जानकारी जलसंपदा विभाग ने दी है.
उन्होंने बताया कि, बुलढाणा के खडकपूर्णा में मात्र 9.09 प्रतिशत पानी जमा है. जबकि अकोला का काटेपूर्णा भी केवल 22 प्रतिशत भरा है. यवतमाल के अरुणावती में 61 और बेंबला में 66 प्रतिशत जलसंग्रह है. इसे मध्यम श्रेणी का कह सकते हैं. नलगंगा और पेनटाकली प्रकल्प अवश्य 80 प्रतिशत से अधिक भरे हैं. उनके कैचमेंट एरिया में अपेक्षाकृत ठीकठाक बरसात हुई है. जिससे बुलढाणा जिले के यह दोनों ही प्रकल्प 82 और 83 प्रतिशत लबालब है. अमरावती संभाग के 27 मध्यम प्रकल्पों में भी मोटे तौर पर 66 प्रतिशत औसत पानी होने की जानकारी दी गई. यवतमाल जिले के 6 प्रकल्पों साईखेडा, गोकी, वाघाडी, बोरगांव, नवरगांव के साथ ही ज्ञानगंगा तथा पालढग में भी अपेक्षाकृत कम पानी इस वर्ष एकत्र हुआ है.

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