यवतमाल के आईपीएस अधिकारी को राहत

हाईकोर्ट ने रद्द किया रेप, एक्ट्रॉसीटी का केस

नागपुर /दि.12- पांच वर्ष पूर्व दर्ज रेप और एक्ट्रॉसीटी के केस से बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने यवतमाल के आईपीएस अधिकारी दर्शन दुगड को बरी कर दिया. खंडपीठ ने मुकदमा ही रद्द कर दिया. न्यायमूर्ति वृषाली जोशी ने यह ऑर्डर जारी किया. मुकदमे के समय दर्शन दुगड यवतमाल जिले में उपविभागीय पुलिस अधिकारी एसडीपीओ के रुप में कार्यरत थे.
इमामवाडा थाने में एक महिला डॉक्टर ने आईपीएस अधिकारी के विरुद्ध शिकायत दी थी. शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि, पुलिस अधिकारी ने 2022 से लेकर 2024 तक विवाह का आश्वासन देकर उसका यौन शोषण किया है. महिला ने शिकायत में प्रताडना और जातिवाचक गालियों का भी आरोप किया था.
शिकायत के अनुसार सोशल मीडिया पर दोनों की पहचान हुई थी. जिसके बाद करीबी बढती गई और दोनों में संबंध प्रस्थापित हुए. शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर ने आरोप लगाया कि, मना करने के बावजूद पुलिस अधिकारी ने उससे बार-बार शारीरिक संबंध बनाए. नागपुर, केरल, हैदराबाद, मुंबई, पुणे ले जाकर आरोपी विवाह का आश्वासन देकर यौन शोषण किए जाने का आरोप किया था.
उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी की ओर से सभी आरोपों को अमान्य करते हुए कहा गया कि, सबकुछ सहमति से हुआ. दोनों के बीच दो वर्षों तक सहमति के संबंध रहे. उनके वकील ने दावा किया कि, संबंध टूटने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है. अदालत ने शिकायत और प्रस्तुत मटेरियल के आधार पर पाया कि, दोनों ही पक्ष पढे-लिखे बालिग है. दोनों ने लंबे समय तक आपस में संबंध रखे. कोर्ट ने यह भी निरीक्षण किया कि, अप्रैल 2024 में विवाह करने से साफ मना करने के बावजूद शिकायतकर्ता ने याचिकाकर्ता से मुलाकाते जारी रखी थी.
सर्वोच्च और उच्च न्यायालय के अनेक निर्णयों का उल्लेख कर कोर्ट ने पाया कि, दोनों के संबंध आपसी सहमति से बने थे. कोर्ट ने एफआईआर और आरोपपत्र रद्द करने का फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता की ओर से एड. राहुल भांगडे, सरकार की ओर से एपीपी एन. पी. जवादे और प्रतिवादी पीडिता की ओर एड. यू. पी. डाबले ने पक्ष रखा

Back to top button