पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख व एड. यशोमति ठाकुर भी ‘आउट ऑफ टाउन’
डॉ. सुनील देशमुख अपना जन्मदिन मनाने परिवार व दोस्तो के साथ महाबलेश्वर के दौरे पर

* एड. यशोमति ठाकुर पारिवारिक आयोजन के चलते गई हुई हैं शहर से बाहर
* ऐन विधान परिषद चुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस के दोनों बडे नेता जिले में नदारद
* कांग्रेस में चयन प्रक्रिया और चुनाव अभियान का पूरा जिम्मा जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख पर
* शहराध्यक्ष बबलू शेखावत व मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले पार्टी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में
अमरावती/दि.26- विधान परिषद की प्रतिष्ठापूर्ण सीट के लिए इस समय अमरावती स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र में जबरदस्त चुनावी धामधूम चल रही हैं. यह चुनाव कांग्रेस पार्टी के लिहासज से काफी महत्वपूर्ण व प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव माना जा रहा है. क्योंकि सन 1954 से लेकर अब तक अमरावती स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट पर कांग्रेस ने लगातार 7 बार जीत हासील की थी. लेकिन वर्ष 2000 में हुए विधान परिषद के चुनाव के बाद से लेकर सन 2018 तक हुए चार चुनावों में कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पडा. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार जिले के स्वायत्त निकायों में पक्षीय बलाबल को देखते हुए कांग्रेस पार्टी द्बारा कम बैक करने की कोशिश की जा सकती हैं. ऐसी स्थिति में पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख एवं पूर्व मंत्री एड. यशोमति ठाकुर जैसे कांग्रेस के दो बड़े नेताओं का अमरावती से बाहर होना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है.
बता दें कि जिले के वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख इन दिनों अपना जन्मदिन मनाने परिवार और मित्रों के साथ महाबलेश्वर दौरे पर गए हुए हैं. वहीं स्थानीय स्तर से लेकर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहुंच व पहचान रखनेवाली कांग्रेस पार्टी की कद्दावर महिला नेत्री व पूर्व मंत्री एड. यशोमती ठाकुर भी पारिवारिक कार्यक्रम के चलते शहर से बाहर बताई जा रही हैं. ऐसे समय में जब भाजपा तेजी से चुनावी मोर्चाबंदी कर रही है और महायुति पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है, तब कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया है.
कांग्रेस पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेताओं के ऐन नामांकन प्रक्रिया के समय अमरावती जिले से बाहर रहने के चलते फिलहाल कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार चयन, चुनावी समन्वय और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी जिलाध्यक्ष बबलू देशमुख के कंधों पर आ गई है. उल्लेखनीय है कि विधान परिषद की सीट हेतु स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय समीकरण और संगठनात्मक प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं. ऐसे में वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है. हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि पार्टी पूरी तरह सक्रिय है और उम्मीदवार घोषित होते ही चुनावी अभियान तेज कर दिया जाएगा. लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा लगातार बनी हुई है कि भाजपा जहां पहले से तैयारी के साथ मैदान में उतर चुकी है, वहीं कांग्रेस अब भी उम्मीदवार चयन और रणनीति तय करने की प्रक्रिया में उलझी हुई नजर आ रही है.
यहां सबसे खास बात यह है कि जिला स्तर पर होने जा रहे इस चुनाव से अमरावती शहर विशेष कर मनपा क्षेत्र की राजनीति पर अपनी मजबुत पकड रखनेवाले मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले एवं कांग्रेस शहराध्यक्ष व पार्षद बबलू शेखावत ने अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी है कि पार्टी द्बारा जिसे भी प्रत्याशी बनाया जाएगा, वे उस प्रत्याशी की दावेदारी का समर्थन करते हुए उसके पक्ष में काम करेंगे और पार्टी प्रत्याशी की जीत के लिए जरूरी प्रयास भी करेंगे.
ऐसे में कहा जा सकता है कि आने वाले कुछ दिन कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे. यदि पार्टी शीघ्र उम्मीदवार घोषित कर मजबूत प्रचार अभियान शुरू नहीं करती, और पार्टी के नेताओं द्बारा प्रचार अभियान में पूरी ताकद के साथ हिस्सा नहीं लिया जाता, तो चुनावी मुकाबले में शुरुआती बढ़त भाजपा के पक्ष में जा सकती है.





