जांच से पहले 25 हजार प्रमाणपत्रों को फर्जी कहना उचित नहीं

जन्म प्रमाणपत्र विवाद

* मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा का स्पष्टीकरण
अमरावती /दि.15- अमरावती मनपा द्वारा वर्ष 2025 और 2026 के दौरान जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्रों को लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया द्वारा लगाए गए आरोपों पर मनपा प्रशासन ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा ने कहा है कि विस्तृत जांच के बिना किसी भी जन्म प्रमाणपत्र को फर्जी घोषित करना उचित नहीं है. हाल ही में किरीट सोमय्या ने दावा किया था कि अमरावती मनपा ने वर्ष 2025 में 35 हजार और वर्ष 2026 में 5 हजार, कुल 40 हजार जन्म प्रमाणपत्र जारी किए हैं. उनका आरोप था कि इनमें से करीब 25 हजार प्रमाणपत्र संशोधन (करेक्शन) के नाम पर जारी किए गए हैं और वे संदिग्ध अथवा फर्जी हो सकते हैं. उन्होंने इन प्रमाणपत्रों की 15 दिनों के भीतर जांच कर निरस्त करने की मांग भी की थी.
* पुराने रिकॉर्ड नहीं होने से जांच में कठिनाई
मनपा आयुक्त वर्षा लढ्ढा ने बताया कि जिन प्रमाणपत्रों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश वर्ष 2016 से पहले के जन्म रिकॉर्ड से जुड़े हैं. ये मामले एड ओल्ड इवेंट श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिनमें पुराने जन्म रिकॉर्ड को वर्तमान प्रणाली में दर्ज किया जाता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 से पहले का अधिकांश डेटा नए सीआरएस (सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम) पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण सत्यापन प्रक्रिया जटिल हो गई है.
* सीआरएस पोर्टल की तकनीकी खामियां बनी बड़ी समस्या
मनपा प्रशासन का कहना है कि नए सीआरएस पोर्टल में कई तकनीकी समस्याएं हैं, जिससे जन्म प्रमाणपत्र जारी करने और सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. पुराने रिकॉर्ड का डेटा नए पोर्टल पर पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने के कारण हजारों लंबित मामलों की जांच में कठिनाई आ रही है. प्रशासन के अनुसार, बार-बार शासन का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद पोर्टल की खामियों का समाधान नहीं हो पाया है. वर्तमान व्यवस्था में प्रति माह लगभग दो हजार प्रमाणपत्रों का ही निपटारा संभव हो पा रहा है, जबकि आवेदनों की संख्या इससे कहीं अधिक है.
* निबंधकों की कमी से बढ़ रही परेशानी
मनपा प्रशासन ने यह भी बताया कि बढ़ते कार्यभार के अनुरूप जन्म-मृत्यु निबंधकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है. कर्मचारियों की कमी के कारण प्रमाणपत्रों के निपटारे में देरी हो रही है. प्रशासन का मानना है कि तकनीकी और मानव संसाधन संबंधी समस्याओं के समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है.
* जांच के बाद ही निकलेगा निष्कर्ष
आयुक्त वर्षा लढ्ढा ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर प्रमाणपत्रों की जांच की योजना बनाई जा रही है, लेकिन व्यापक सत्यापन के लिए तकनीकी अड़चनों का दूर होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि सभी रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है और उससे पहले हजारों प्रमाणपत्रों को फर्जी बताना उचित नहीं होगा. जन्म प्रमाणपत्र विवाद के बीच अब नागरिकों और प्रशासन की नजरें सीआरएस पोर्टल की तकनीकी समस्याओं के समाधान और पुराने रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर टिकी हुई हैं.

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