बाजार में हर ओर, ‘मुंढे-मुंढे’ का ही शोर

खाद्य पेय पदार्थ विक्रेता के बीच अच्छा खासा हडकंप

* दूग्ध उत्पादों व खाद्य तेलों के धडाधड उठाए जा रहे सैम्पल
* प्रतिबंधित गुटखे, सुंगधित तंबाखू व किवाम का बाजार से स्टॉक ही नदारद
अमरावती/दि.17 – इस समय अमरावती शहर सहित जिले के बाजारों में केवल एक ही व्यक्ति की चर्चा है और हर ओर केवल ‘मुंढे’ नाम का ही शोर सुनाई दे रहा है. जिसके चलते खाद्य पेय पदार्थ विक्रेताओं के बीच अच्छा खासा हडकंप मचा हुआ है. क्योंकि दुग्ध उत्पादों व खाद्य तेलों के धडाधड सैम्पल उठाए जा रहे है. जिसके चलते जहां एक ओर पैकेज्ड दुग्ध उत्पादों, जैसे कि पैकेटबंद दूध, दही, पनीर व चीज जैसे उत्पादों के बाहर से होनेवाली आवक अचानक घट गई है. वहीं खुले में होनेवाली तेल की बिक्री अच्छी खासी प्रभावित हुई है तथा अब तक कच्चे में होनेवाली खुले तेल की विक्री की बजाय तेल की एक-एक बूंद का पक्के में हिसाब रखा जा रहा है. साथ ही साथ ‘मुंढे’ नाम की इतनी अधिक दहशत है कि बाजार में, विशेषकर पानठेलों पर अब तक धडल्ले के साथ बिक रहे प्रतिबंधित गुटखे, सुंगधित तंबाखू व अलग-अलग ब्रांड वाले किवाम जैसे उत्पादों का स्टॉक अचानक ही नदारद हो गया है. इस स्थिति को कहीं न कहीं बाजार पर ‘मुंढे इफेक्ट’ माना जा रहा है.
बता दें कि हाल ही में अपनी अलग कार्यशैली के लिए विख्यात रहनेवाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अन्न व औषधी प्रशासन आयुक्त के तौर पर अपना पदभार संभाला. मुंढे के एफडीए आयुक्त बनते ही जहां एक ओर प्रतिबंधित गुटखा की तस्करी और बिक्री करनेवाले गुटखा माफिया में जबर्दस्त हडकंप मचा. वहीं दूसरी ओर खाद्य पेय पदार्था के विक्रेता भी अब अपने द्बारा बेचे जानेवाले उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर काफी अधिक सतर्क हो गये. क्योंकि आईएस अधिकारी तुकाराम मुंढे अपने कामकाज एवं सिध्दांतों के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करने के लिए विख्यात है और अलग-अलग पदों पर रहते हुए उनके द्बारा की गई कार्रवाईयों के कई किस्से बेहद मशहूर ही है. जिसके चलते यह तय माना जा रहा है कि एफडीएआई के तौर पर भी तुकाराम मुंढे का कार्यकाल बेहद चर्चित व सनसनीखेज रहनेवाला है. जिसकी झलक तुकाराम मुंढे ने एफडीए आयुक्त बनते ही वर्धा के विश्वविख्यात गोरस भंडार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिखा दी. जिसका असर अब अमरावती शहर सहित जिले के साथ साथ विदर्भ क्षेत्र के अन्य शहरों व जिलों पर भी दिखाई देना शुरू हो गया है.
* शहर सहित जिले में पनीर की आवक व विक्री घटी
बता दें कि इन दिनों दूध से बनने वाले पनीर का विभिन्न तरह के खाद्य पदार्थों एवं व्यंजनों में प्रयोग काफी अधिक बढ गया है. जिसके चलते खाद्य पेय पदार्थो की छोटी-बडी दुकानों सहित लगभग सभी घरों में पनीर अब दैनिक जरूरत बन चुका है. जिसके चलते स्थानीय स्तर पर दूध डेयरियों द्बारा खुद बनाए जानेवाले पनीर की बिक्री के साथ-साथ जिले में अमूल, दिनशॉ व न्यूट्रीला जैसी कंपनियों का भी डेढ से दो हजार किलो पनीर अमरावती में आता है. एक अनुमान के मुताबिक अमरावती में रोजाना करीब 4 हजार किलो पनीर की मांग रहती है. जिसे देखते हुए कई बार कम गुणवत्ता वाले अथवा नकली पनीर की विक्री होने की भी संभावना बनी रहती है.
विशेष उल्लेखनीय है कि जबसे तुकाराम मुंढे एफडीए आयुक्त के तौर पर आए है. तब से अमरावती में अचानक ही दो हजार किलो पनीर की शॉर्टेज होने लगी है. ज्ञात रहे कि अमरावती शहर सहित जिले में करीब 500 से 700 दूध डेयरियां है जो खुद ही दूध संकलित करते हुए पनीर का उत्पादन और विक्री करते हैं. वहीं किराणा दुकानों सहित डिपार्टमेंटल स्टोर जैसे प्रतिष्ठानों में विभिन्न कंपनियों द्बारा उत्पादति पैकेट बंद पनीर की विक्री होती है. परंतु पिछले 5-6 दिनों से जहां एक ओर किराणा दुकानों में पनीर ही उपलब्ध नहीं है. वहीं दूसरी ओर दूध डेयरियों मेंं भी इस बात का जबर्दस्त हिसाब किताब रखा जा रहा है कि कितना पनीर बना और कितना पनीर बिका. सबसे खास बात यह है कि राजकमल चौक पर रोजाना सुबह से लेकर शाम तक खुले में होनेवाली नांदुरा खोवा एवं पनीर की विक्री पूरी तरह से बंद है. इस स्थिति के चलते शहर में जगह-जगह खुले कैफे में बिकनेवाले पिज्जा जैसे उत्पादों की टॉपिंग्स से पनीर व चीज पूरी तरह गायब हो चुकी है.
इसके अलावा तुकाराम मुंढे के एफडीए आयुक्त बनते ही खाद्य तेलों की विक्री के समीकरण भी जमकर गडबडाए है. अमरावती शहर सहित जिले में रोजाना लगभग 30 हजार लीटर खाद्य तेलों की विक्री होती है. जिले में भुवनेश्वरी, गोंविंद फुड व अमरावती फुड जैसी तीन बडी तेल रिफायनरी है. जहां से अब केवल उन्हीं खरीदारों को टीन पैक तेल की विक्री की जा रही है. जिनके पास ‘एफएसएसएएआय’ का लायसेंस है. साथ ही फुटकर विक्रेता रहनेवाले ऐसे खरीददारों द्बारा भी खुले तेल की विक्री करते समय एक-एक बूंद तेल का हिसाब किताब रखा जा रहा है. जबकि पहले तेल की बेधडक खरीदी-विक्री हुआ करती थी. ज्ञात रहे कि जिले में छोटी-बडी मिलाकर लगभग 5 हजार किराणा दुकानें और तेल भंडार है. जहां पर इससे पहले तेल का 15 किलों वाला टीन लाकर उसमें से खुले तेल की विक्री की जाती थी. लेकिन मुंढे के एफडीए आयुक्त बनते ही अब अन्न औषधी प्रशासन विभाग द्बारा खुले तेल की विक्री पर कडी नजर रखने के साथ-साथ तेल की गुणवत्ता पर भी जबर्दस्त तरीके से ध्यान दिया जा रहा है.
आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे के एफडीए कमिश्नर बनने का सबसे अधिक फर्क एवं प्रभाव प्रतिबंधित गुटखें के अवैध व्यवसाय पर पडा. क्योंकि मुंढे ने एफडीए आयुक्त बनते ही गुटखा तस्करों व गुटखा विक्रेताओं के खिलाफ मकोका की धाराए लगाते हुए कार्रवाई करने की घोषणा की थी. जिसके चलते कई गुटखा तस्कर इस वक्त अंडर ग्रांउड हो गये है. साथ ही कई गुटखा विक्रेताओं ने अपने पास रहनेवाले गुटखे सहित सुंगधित तंबाखू जन्य उत्पादों को तुरंत ही इधर-उधर करते हुए अपने गोदामों व दुकानों को खाली कर दिया है. जिसके चलते अभी हाल फिलहाल तक धडल्ले के साथ होनेवाली गुटखा विक्री एक ही झटके के साथ पूरी तरह से बंद हो गई है.
खास बात यह है कि अवैध गुटखा तस्करी व विक्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एफडीए के 10 से 15 अधिकारियों की टीम विगत 4-5 दिनों से लगातार अमरावती शहर सहित जिले के दौरे पर है. जो रोजाना सुबह से लेकर शाम तक रेलवे स्टेशन चौक एवं वसंत टॉकिज परिसर जैसे गुटखा विक्री के बडे ठिकानें रहनेवाले परिसरों पर अपनी नजर रख रहे है. साथ ही शहर सहित जिले में पान पराग, पान बहार व नजर जैसे गुटखे सहित सुंगंधित तंबाखू एवं किवाम जैसे उत्पादों की खेप कहां से लायी जाती है. इसकी भी पडताल कर रही है. सूत्रों के मुताबिक मुंबई से आयी एफडीए अधिकारियों की यह टीम अगले तीन चार दिनों तक अमरावती में ही बनी रहेगी और इस दौरान अपने द्बारा किए गये निरीक्षण की रिपोर्ट सीधे एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे को देगी.

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