किनारों पर पड़ा कचरा, गाद जस की तस, बारिश में फिर बढ़ा जलभराव और बाढ़ का खतरा

शहर में नाला सफाई केवल कागजों पर, जमीनी स्तर पर पूरा मामला गोलमाल!

* महापौर की दी हुई 25 जून की डेडलाइन खत्म होने में महज 5 दिन बाकी
* बडे नालों के साथ-साथ छोटे नालों की सफाई भी अब तक पडी है अधूरी
अमरावती/ दि. 20- मानसून की दस्तक के साथ ही अमरावती महानगर पालिका की नाला सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. महापौर श्रीचंद तेजवानी द्वारा 25 जून तक शहर के सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई पूरी करने की समयसीमा तय किए जाने के बावजूद अधिकांश कार्य अधूरा है. हालात यह हैं कि बड़े नालों से निकाला गया कचरा भी पूरी तरह हटाने के बजाय उनके किनारों पर ही छोड़ दिया गया है, जबकि वर्षों से जमा गाद (सिल्ट) को छुआ तक नहीं गया. ऐसे में तेज बारिश की स्थिति में नालों की जलधारण क्षमता बढ़ने के बजाय पहले जैसी ही बनी हुई है.
बता दे कि महानगर पालिका की विगत मई माह में हुई आमसभा में शहर के 16 बड़े नालों, 18 उपनालों और अनेक छोटे नालों की तत्काल सफाई करने के निर्देश दिए गए थे. उद्देश्य स्पष्ट था कि बरसात के दौरान नालों के किनारे रहने वाले नागरिकों के घरों में पानी न घुसे और शहर को बाढ़ जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े. लेकिन निर्धारित समयसीमा पूरी होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं और अधिकांश उपनालों तथा छोटे नालों की सफाई अभी तक पूरी नहीं हो सकी है.
* गाद नहीं निकली, इसलिए नहीं बढ़ी नालों की गहराई
मनपा प्रशासन का तर्क है कि नालों से गाद निकालने के लिए लगभग 40 से 50 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान आर्थिक स्थिति में संभव नहीं है. परिणामस्वरूप केवल प्लास्टिक, थर्माकोल और अन्य ठोस कचरा निकालने तक ही सफाई अभियान सीमित रहा. विशेषज्ञों के अनुसार नालों की वास्तविक क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकालना सबसे आवश्यक होता है. गाद हटाए बिना नालों की गहराई नहीं बढ़ती और थोड़ी देर की तेज बारिश में भी पानी का बहाव बाधित हो सकता है. यही कारण है कि हर वर्ष शहर के कई हिस्सों में पुलों के ऊपर से पानी बहने की स्थिति बन जाती है.
* किनारों पर पड़ा कचरा फिर बन सकता है संकट
नाला सफाई के दौरान निकाला गया कचरा नालों से दूर ले जाकर निस्तारित करने के बजाय कई स्थानों पर किनारों पर ही डाल दिया गया है. शहरवासियों का कहना है कि यदि लगातार बारिश हुई तो यही कचरा दोबारा नालों में बहकर जाएगा और पानी के प्रवाह में रुकावट पैदा करेगा. इससे सफाई अभियान का उद्देश्य ही विफल हो सकता है.
* हर साल डूबते हैं पुल, ठप होती है यातायात व्यवस्था
ज्ञात रहे कि अमरावती में कई ऐसे स्थान हैं, जहां भारी बारिश के दौरान पुलों के ऊपर से पानी बहना आम बात बन गई है. श्री अंबादेवी मंदिर के सामने स्थित पुल, भुतेश्वर चौक का पुल तथा गोसावी लेआउट क्षेत्र का पुल हर वर्ष जलमग्न हो जाते हैं. विशेष रूप से गोसावी लेआउट का पुल निचले स्तर पर होने के कारण यहां पानी भरने की समस्या अधिक गंभीर रहती है. जब तक पानी का स्तर कम नहीं होता, तब तक नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ता है. इससे यातायात व्यवस्था बाधित होती है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
* 2016 की बाढ़ से भी नहीं लिया सबक
शहरवासियों को वर्ष 2016 की वह घटना आज भी याद है, जब अंबानाला में कचरा फंस जाने के कारण दिवाली से पहले हुई मूसलाधार बारिश में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी. नमूना क्षेत्र सहित कई इलाकों में घरों के भीतर पानी घुस गया था और नागरिकों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था. स्थानीय लोगों का कहना है कि उस घटना से प्रशासन को सबक लेना चाहिए था, लेकिन आज भी नाला सफाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.
* शहर के 16 बड़े नालों की हुई सफाई का दावा
मनपा प्रशासन के अनुसार अंबानाला, आनंदनगर, भुतेश्वर चौक, देबूजी नगर, लालखड़ी, वेलकम पॉइंट, कठोरा रिंग रोड, आरोग्य कॉलोनी-मोर्शी रोड, बडनेरा-झिरी मार्ग, मिलचाल क्षेत्र, पिंपरी रोड, अकोली, भातकुली रोड, आजाद नगर पुल, मालू लेआउट और तपोवन बायपास क्षेत्र सहित शहर के 16 बड़े नालों से कचरा निकाला गया है.इ हालांकि नागरिकों का कहना है कि केवल कचरा हटाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि नालों की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकालना और उपनालों की सफाई भी उतनी ही आवश्यक है.
* छोटे नालों और उपनालों की सफाई अब भी अधूरी
मनुष्यबल की कमी और संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए प्रशासन अब तक 18 उपनालों की सफाई पूरी नहीं कर पाया है. इससे आशंका है कि इन उपनालों में जमा कचरा बारिश के दौरान बड़े नालों में पहुंचकर जलनिकासी व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है.
* हर साल खर्च होते हैं 50 लाख रुपये
महानगर पालिका के अनुसार पोकलेन और जेसीबी मशीनों की सहायता से शहर के 16 बड़े नालों की सफाई पर प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं. अकेला अंबानाला करीब 12 किलोमीटर लंबा है, जबकि अन्य प्रमुख नाले भी 8 से 9 किलोमीटर लंबे हैं. कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारों का अभाव है और अनेक पुलों की ऊंचाई तथा चौड़ाई बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.
* आयुक्त वर्षा लढ्ढा ने दिए तेज गति से काम पूरा करने के निर्देश
हाल ही में मनपा आयुक्त ने शहर के विभिन्न बड़े नालों का निरीक्षण कर सफाई कार्य की समीक्षा की. उन्होंने संबंधित विभागों को सफाई कार्य व्यवस्थित ढंग से पूरा करने, नालों में कचरा फेंकने पर रोक लगाने तथा नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं.
* क्या बोले अधिकारी?
मनपा के कार्यकारी अभियंता सुहास चव्हाण के अनुसार, शहर के सभी 16 बड़े नालों से कचरा निकाल दिया गया है और जलप्रवाह बाधित न हो, इस दृष्टि से काम किया गया है. हालांकि गाद नहीं निकाली गई है. उपनालों की सफाई का कार्य अभी जारी है.
* बड़ा सवाल
उल्लेखनीय है कि इस समय मानसून का सीजन बस शुरू होने में ही है. वहीं बारिश के मौसम को देखते हुए महापौर श्रीचंद तेजवानी द्बारा दी गई डेडलाइन पूरी होने में अब केवल पांच दिन शेष हैं. ऐसे में यदि अगले कुछ दिनों में तेज बारिश होती है, तो अधूरी नाला सफाई, किनारों पर पड़ा कचरा और नालों में जमी गाद शहर के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है. सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते तैयारी पूरी कर पाएगा या फिर हर साल की तरह इस बार भी पहली तेज बारिश में व्यवस्था की पोल खुल जाएगी?

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