शेगांव से संत गजानन महाराज पालखी का पंढरपुर के लिए भव्य प्रस्थान
57 वें पालखी सोहले में सैकड़ों वारकरी शामिल

* भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम
शेगांव /दि.22- आषाढ़ी वारी के पावन अवसर पर विदर्भ के आराध्य संत श्री गजानन महाराज की पारंपरिक पालखी यात्रा का रविवार सुबह श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में शुभारंभ हुआ. श्री संत गजानन महाराज संस्थान से सुबह 7 बजे पालखी पंढरपुर के लिए रवाना हुई. इस वर्ष पालखी सोहला अपने 57वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में वारकरी, टालकरी, पताकाधारी और सेवेकरी सहभागी हुए हैं. पालखी प्रस्थान के समय पूरा शेगांव गण गण गणात बोते और विठ्ठल-विठ्ठल के जयघोष से गूंज उठा. संस्थान परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने पालखी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया और भावपूर्ण विदाई दी.
जानकारी के अनुसार, इस वर्ष लगभग 700 वारकरी, पताकाधारी और टालकरी पालखी यात्रा में शामिल हैं. यह पालखी पंढरपुर तक लगभग 750 किलोमीटर की पदयात्रा करेगी, जबकि वापसी सहित कुल यात्रा करीब 1300 किलोमीटर की होगी. यात्रा के दौरान अनुशासन, सेवा और स्वच्छता की परंपरा का विशेष रूप से पालन किया जाएगा. संस्थान द्वारा वारकरियों के भोजन, आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गई है. यात्रा मार्ग पर विभिन्न गांवों और शहरों में श्रद्धालुओं द्वारा पालखी का स्वागत किया जाएगा. भजन, कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और सामाजिक संदेशों के माध्यम से यह यात्रा जनजागरण का कार्य भी करेगी.
संस्थान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संत गजानन महाराज की पालखी 23 जुलाई को पंढरपुर पहुंचेगी और आषाढ़ी एकादशी के पावन उत्सव में सहभागी होगी. इसके बाद विठ्ठल-रुक्मिणी के दर्शन कर पालखी का वापसी प्रवास प्रारंभ होगा. महाराष्ट्र की वारकरी परंपरा में संत गजानन महाराज की पालखी का विशेष महत्व माना जाता है. यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, समर्पण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण का जीवंत प्रतीक है.





