कल से पारस प्रकल्प के कामगारों का अनिश्चितकालीन आंदोलन

न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा : भाई जी.एम. भालेराव

अकोला / दि. 18- जिले के पारस स्थित एफजीडी (फ्ल्यू गैस डीसल्फराइजेशन) परियोजना में कार्यरत ठेका श्रमिकों के कथित शोषण और बकाया वेतन के मुद्दे को लेकर महाराष्ट्र राज्य वीज निर्मिती रोजंदारी मजदूर सेना ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है. संगठन के केंद्रीय कार्याध्यक्ष भाई जी.एम. भालेराव ने घोषणा की है कि परियोजना के श्रमिकों के न्यायोचित अधिकारों और बकाया भुगतान के लिए 19 जून से सनदशीर मार्ग से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा.
भालेराव ने कहा कि पारस एफजीडी परियोजना में कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों के श्रम का खुलेआम शोषण किया जा रहा है, जबकि परियोजना प्रबंधन और संबंधित ठेकेदार श्रमिकों की समस्याओं के प्रति उदासीन बने हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना का काम अभी पूर्ण भी नहीं हुआ है, इसके बावजूद मेसर्स अभि इंजीनियरिंग कंपनी के ठेकेदार मलकित सिंह ने लगभग 50 श्रमिकों को बिना किसी पूर्व सूचना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए अचानक काम से हटा दिया. इससे स्थानीय श्रमिकों में भारी रोष व्याप्त है.
श्रमिक संगठन के अनुसार एफजीडी परियोजना के मुख्य ठेकेदार ब्रिज एंड रूफ कंपनी द्वारा अभि इंजीनियरिंग कंपनी के कार्यों का भुगतान लंबित रखा गया है. वहीं अभि इंजीनियरिंग का दावा है कि भुगतान न मिलने के कारण आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है. दूसरी ओर केपीके कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार मलकित सिंह का कहना है कि जब उन्हें बिल का भुगतान नहीं मिला तो वे मजदूरों का वेतन कहां से देंगे. भालेराव ने इस प्रकार के बयानों को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि ठेकेदारों और कंपनियों के आपसी आर्थिक विवाद का खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है.
भाई जी.एम. भालेराव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि श्रमिकों की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार है और किसी भी प्रकार का अन्याय सहन नहीं किया जाएगा. उन्होंने प्रशासन, परियोजना प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों से हस्तक्षेप कर श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि श्रमिकों के परिवारों का जीवनयापन वेतन पर निर्भर है और लंबे समय से भुगतान न मिलने के कारण अनेक परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
19 जून से शुरू होने वाला यह आंदोलन पारस एफजीडी परियोजना क्षेत्र में श्रमिकों के अधिकारों की लड़ाई का बड़ा केंद्र बन सकता है, जिस पर अब प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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