शिक्षा उपसंचालक कार्यालय पर शिक्षकों का ‘प्रशासन जगाओ’ आंदोलन

शासन की निःशुल्क शिक्षा समाप्त करने की निति के विरोध में शिक्षकों का संघर्ष

* धरना आंदोलन में सैकडों शिक्षक हुए शामिल
अमरावती/दि.24- राज्य में मुफ्त शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने और ऑनलाइन बैच स्वीकृति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में शिक्षकों ने बुधवार को डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया. विदर्भ जुनियर कॉलेज शिक्षक संघ के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन को अवेकन द एडमिनिस्ट्रेशन नाम दिया गया.
आंदोलन का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष डॉ. अविनाश बोर्डे ने किया. इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे. प्रदर्शन में प्रो. अरविंद मांगले, प्रो. रमेश खाड़े, प्रो. रवींद्र कवारे, प्रो. विनय काले, प्रो. रंगराव लांजेवार, प्रो. डी.एस. राठौड़, प्रो. अनिल काले, प्रो. संतोष वाघ सहित अनेक शिक्षक शामिल हुए. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों से मुफ्त शिक्षा व्यवस्था को समाप्त कर भुगतान आधारित शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की नीति अपना रही है. उनका कहना है कि 15 मार्च 2024 के सरकारी आदेश के कारण राज्य के कई नि:शुल्क शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. अब सरकार ऑनलाइन बैच स्वीकृति के लिए वर्तमान नियमों को दरकिनार कर नए और गलत मानदंड लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसका शिक्षक संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है.
शिक्षकों ने मांग की कि ऑनलाइन बैचों की मान्यता और स्वीकृति मौजूदा नियमों और निर्धारित मानदंडों के आधार पर ही दी जाए. उनका कहना है कि बैच स्वीकृति प्रक्रिया में किए गए अस्थायी बदलावों के बावजूद कई जगह गलत तरीके से स्वीकृतियां दी जा रही हैं, जिससे हजारों शिक्षकों की नौकरियां प्रभावित होने की आशंका है. आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि छात्र संख्या के मानदंडों में बदलाव कर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के जूनियर कॉलेजों को बंद करने का रास्ता तैयार किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर छात्राओं की शिक्षा को ध्यान में रखकर बनाए गए कई महत्वपूर्ण मानदंडों को समाप्त कर दिया गया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को आयु संबंधी कारणों से अयोग्य ठहराया जा रहा है. संयुक्त बैचों के विद्यार्थियों की गणना नहीं की जा रही, बहुविषयक बैचों से जुड़े मौजूदा नियमों की अनदेखी की जा रही है, प्रायोगिक विषयों के लिए विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा रही है तथा विषय संयोजन में भी त्रुटियां की जा रही हैं. इन सभी मुद्दों को लेकर विभाग के हजारों शिक्षक राज्यभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. अमरावती में हुए इस आंदोलन में प्रो. मंगेश कांडलकर, प्रो. डॉ. आनंद देशमुख, प्रो. साहेबराव जुमले, प्रो. प्रदीप शेवतकर सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया और प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की.

Back to top button