नशे में होने पर भी मुआवजा पाने का हक नहीं छिनता
ट्रिब्यूनल ने युवक को 30.77 लाख देने का आदेश

नई दिल्ली /दि.26 – मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल इसलिए किसी सड़क दुर्घटना पीड़ित को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके शरीर में शराब की मौजूदगी पाई गई थी. ट्रिब्यूनल ने दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 21 वर्षीय युवक को 30.77 लाख रुपये मुआवजा और ब्याज देने का आदेश दिया है.
यह मामला सचिन धवन की याचिका से जुड़ा है. 5 जुलाई 2018 को सचिन अपनी दोपहिया वाहन से जा रहे थे, तभी एक ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी. दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनके शरीर के बाएं हिस्से में 40 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता हो गई. सुनवाई के दौरान बीमा पक्ष ने तर्क दिया कि मेडिकल रिपोर्ट में सचिन की सांस में अल्कोहल पाए जाने का उल्लेख है. हालांकि ट्रिब्यूनल ने कहा कि केवल अल्कोहल की मौजूदगी से यह साबित नहीं होता कि दुर्घटना युवक की लापरवाही या नशे की वजह से हुई थी.
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति शराब के प्रभाव में पाया जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि अन्य वाहन चालकों को उसे टक्कर मारने या यातायात नियमों की अनदेखी करने की छूट मिल जाती है. कानून सभी वाहन चालकों पर समान रूप से लागू होता है. अधिकरण ने यह भी कहा कि ट्रक चालक के पास अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा अवसर था. वह यह साबित कर सकता था कि बाइक सवार लापरवाही से वाहन चला रहा था या उसने हेलमेट नहीं पहना था. लेकिन ट्रक चालक ट्रिब्यूनल के समक्ष गवाही देने के लिए उपस्थित ही नहीं हुआ.
ट्रिब्यूनल को ऐसा कोई रिकॉर्ड या साक्ष्य नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि दुर्घटना हेलमेट न पहनने या बाइक चालक की लापरवाही के कारण हुई थी. इसलिए दुर्घटना के लिए ट्रक चालक को जिम्मेदार मानते हुए ट्रक मालिक को पीड़ित को 30 लाख 77 हजार रुपये मुआवजा तथा निर्धारित ब्याज देने का निर्देश दिया गया. इस फैसले में ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट संदेश दिया कि दुर्घटना के मामलों में मुआवजे का अधिकार तथ्यों और जिम्मेदारी के आधार पर तय होगा, न कि केवल इस आधार पर कि पीड़ित के शरीर में शराब पाई गई थी.





