दिव्यांग बालिका की सहायता पर भी डाली नजर!
12 हजार रुपये रिश्वत लेते संरक्षण अधिकारी रंगेहाथ गिरफ्तार

* महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी समेत संविदा कर्मचारी एसीबी के जाल में फंसे
* 24 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
बुलढाणा/दि.26- सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर रिश्वतखोरी की एक शर्मनाक घटना बुलढाणा जिले के जलगाव जामोद में सामने आई है. दिव्यांग बालिका को मिलने वाली आर्थिक सहायता के बदले रिश्वत मांगने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग के एक संरक्षण अधिकारी और एक संविदा कर्मचारी को भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग (एसीबी) ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत संरक्षण अधिकारी तुषार रमेश राणे तथा बहुउद्देशीय संविदा कर्मचारी जगन्नाथ तुकाराम भिवटे ने एक दिव्यांग बालिका को कांतीज्योती बाल संगोपन योजना का लाभ दिलाने और भविष्य में भी योजना की सहायता जारी रखने के बदले 24 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की थी.
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में भ्रष्टाचार प्रतिबंधक विभाग से संपर्क किया. शिकायत की सत्यता जांचने के बाद एसीबी ने जलगाव जामोद स्थित तालुका शेतकरी खरेदी-विक्री संघ कार्यालय के समीप जाल बिछाया. तय योजना के अनुसार जैसे ही आरोपियों ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 12 हजार रुपये स्वीकार किए, एसीबी की टीम ने उन्हें रंगेहाथ दबोच लिया. जांच में सामने आया कि तुषार राणे मलकापुर में पदस्थ हैं तथा उनके पास संग्रामपुर क्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार भी है. शिकायतकर्ता की दिव्यांग भतीजी को योजना का लाभ दिलाने के बदले रिश्वत मांगी गई थी. एसीबी ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 12 के तहत मामला दर्ज किया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे जांच की जा रही है और रिश्वतखोरी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी.
यह कार्रवाई अमरावती एसीबी के पुलिस अधीक्षक बापू बांगर तथा बुलढाणा के पुलिस उपाधीक्षक भागोजी चोरमले के मार्गदर्शन में की गई. कार्रवाई में निरीक्षक रमेश पवार, विलास गुसांगे, प्रवीण बैरागी, अमोल झिने, प्रफुल्ल आमले, दीपक जाधव, जगदीश पवार, लक्ष्मीकांत इंगळे, श्याम भांगे, गजानन गाल्डे, रंजीत व्यवहारे, नितीन शेटे तथा अनिता वारंगने सहित एसीबी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया.
दिव्यांग और जरूरतमंद बच्चों के कल्याण के लिए बनाई गई योजना में भी रिश्वत मांगने की घटना सामने आने से सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि गरीब और असहाय लोगों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए.





