विशेष दुकान से ‘शालेय साहित्य’ खरीदने की सख्ती पड़ेगी महंगी

खंड शिक्षणाधिकारी का मुख्याध्यापकों को पत्र

अमरावती/दि.26 – जिले के सरकारी, अनुदानित, बिना अनुदानित तथा अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में विद्यार्थियों के अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से शालेय साहित्य खरीदने के लिए बाध्य करना अब संबंधित स्कूल प्रशासन पर भारी पड़ सकता है. खंड शिक्षणाधिकारी ने सभी विद्यालयों के मुख्याध्यापकों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुस्तकों, कॉपियों, गणवेश, जूते-मोजे अथवा अन्य शैक्षणिक सामग्री किसी विशिष्ट दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों पर किसी प्रकार का दबाव न बनाया जाए.
पत्र में कहा गया है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों या अभिभावकों को किसी निश्चित दुकान से सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायत सही पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित मुख्याध्यापक एवं विद्यालय प्रबंधन को सीधे जिम्मेदार माना जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. वर्तमान में नए शैक्षणिक सत्र के प्रवेश जारी हैं. इसी दौरान जिले के कई निजी विद्यालयों द्वारा गणवेश, पुस्तकें, कॉपियां एवं अन्य सामग्री निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के मौखिक निर्देश दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. अभिभावकों का आरोप है कि इन दुकानों पर बाजार मूल्य से कहीं अधिक कीमत वसूली जा रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.
उल्लेखनीय है कि शासनस्तर पर पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी भी विद्यालय को विद्यार्थियों को किसी विशेष दुकान से शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है. शिक्षण उपसंचालक के निर्देशों के बावजूद कुछ स्थानों पर यह प्रथा जारी रहने की शिकायतें मिल रही थीं. इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खंड शिक्षणाधिकारी नंदकिशोर खरात ने जिले के सभी संबंधित विद्यालयों को चेतावनी जारी की है कि निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर मुख्याध्यापक एवं विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध जवाबदेही तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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