दो अधिकारी निलंबित, वरिष्ठ अधिकारियों की भी होगी जांच
आदिवासी अध्ययन केंद्र किराया घोटाला

* आदिवासी विकास मंत्री की घोषणा
अमरावती /दि.27- आदिवासी छात्रों के अध्ययन केंद्र और छात्रावास के लिए किराए पर भवन लेने में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उइके ने घोषणा की कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर गड़बड़ियां पाए जाने पर गृह प्रमुख गायत्री पटेल और गृहपाल चंद्रशेखर बाजपेयी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाएगा.
यह मामला गाडगेनगर स्थित सरकारी अध्ययन केंद्र उपलब्ध होने के बावजूद राजकमल चौक के एक निजी मॉल में अध्ययन केंद्र और छात्रावास के लिए लगभग 8 लाख 683 रुपये प्रतिमाह किराए पर भवन लेने से जुड़ा है. इस पर विधानसभा में सुलभा खोडके ने सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए इसे सरकारी धन की बर्बादी बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. जवाब में मंत्री डॉ. उइके ने स्वीकार किया कि किरायेदारी प्रक्रिया में 100 प्रतिशत गड़बड़ी हुई है. उन्होंने बताया कि अतिरिक्त आयुक्त कार्यालय के अंतर्गत आने वाले संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है तथा मामले की अनदेखी करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी.
विधायक सुलभा खोडके ने सदन में मांग की कि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई दोषी अधिकारियों से कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. इस प्रकरण की जांच के लिए 11 मई को अतिरिक्त आयुक्त के माध्यम से एक जांच समिति गठित की गई थी. समिति ने 29 मई को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें अध्ययन केंद्र के किराया अनुबंध में गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की पुष्टि की गई. इसके आधार पर सरकार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की है.