तोते की मौत पर फूट-फूटकर रोया परिवार

टीटी’ की यादों को संजोने बनेगा स्मृति स्थल

* 27 साल तक परिवार का सदस्य रहा ‘टीटी’
नागपुर/दि.2- इंसान और पालतू जीवों के बीच का रिश्ता कितना गहरा और भावनात्मक हो सकता है, इसका मार्मिक उदाहरण नागपुर जिले के पारशिवनी में देखने को मिला. यहां रजत परिवार के साथ पिछले 27 वर्षों से रह रहा ‘टीटी’ नाम का पालतू तोता दुनिया से विदा हो गया. उसके निधन से परिवार इतना भावुक हो गया कि सभी सदस्य धाय मारकर रो पड़े. परिवार ने टीटी का विधिवत अंतिम संस्कार किया और उसकी यादों को हमेशा जीवित रखने के लिए स्मृति स्थल बनाने का निर्णय लिया है.
रजत परिवार के लिए टीटी कोई साधारण पालतू पक्षी नहीं था, बल्कि घर का एक सदस्य था. उसकी मौजूदगी परिवार के दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी थी. उसके जाने से परिवार को ऐसा महसूस हो रहा है मानो घर का कोई अपना सदस्य हमेशा के लिए बिछड़ गया हो.
* 1999 में परिवार का हिस्सा बना था टीटी
पारशिवनी निवासी प्रशांत सुरजलाल रजत के परिवार में टीटी का आगमन 10 मार्च 1999 को हुआ था. उस समय वह संकटग्रस्त अवस्था में मिला था. परिवार के मुखिया उसे घर ले आए और उसका पालन-पोषण शुरू किया. धीरे-धीरे टीटी घर के सभी सदस्यों के बेहद करीब हो गया और परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया. समय के साथ टीटी केवल एक पालतू पक्षी नहीं रहा, बल्कि परिवार की खुशियों, उत्सवों और रोजमर्रा की जिंदगी का सहभागी बन गया. उसकी उपस्थिति ने घर के वातावरण में विशेष अपनापन भर दिया था.
* तबीयत बिगड़ने की खबर मिलते ही पुणे से पहुंचे
प्रशांत रजत वर्तमान में पुणे में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं. 27 जून को उन्हें टीटी की तबीयत अचानक खराब होने की सूचना मिली. यह खबर मिलते ही उन्होंने अपनी पत्नी नंदिनी के साथ लगभग 13 घंटे की यात्रा कर पारशिवनी पहुंचने का निर्णय लिया. परिवार को उम्मीद थी कि टीटी स्वस्थ हो जाएगा, लेकिन 28 जून को उसने अंतिम सांस ली. उसके निधन की खबर ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया.
* अंतिम विदाई के समय छलक पड़े आंसू
टीटी की मौत के बाद परिवार ने पूरे विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया. इस दौरान परिवार के सभी सदस्य मौजूद रहे. अंतिम विदाई देते समय घर का माहौल बेहद भावुक हो गया और कई सदस्य अपने आंसू नहीं रोक सके. परिवार का कहना है कि उन्होंने कभी टीटी को केवल एक पक्षी नहीं माना. वह परिवार के प्रत्येक सदस्य से जुड़ा हुआ था और सभी के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका था.
* बेहद समझदार और चंचल था टीटी
परिवार के अनुसार टीटी अत्यंत बुद्धिमान और मिलनसार था. भोजन के समय वह परिवार के सदस्यों के पास बैठ जाता था, सीटी बजाता था और पूरे घर में स्वतंत्र रूप से घूमता रहता था. उसकी आवाज, शरारतें और रोजमर्रा की आदतें आज भी परिवार की स्मृतियों में ताजा हैं. परिवार के सदस्य बताते हैं कि टीटी की मौजूदगी से घर हमेशा जीवंत बना रहता था. उसके जाने के बाद घर में एक खालीपन महसूस हो रहा है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा.
* यादों को अमर करने बनेगा स्मृति स्थल
टीटी की स्मृतियों को हमेशा जीवित रखने के लिए रजत परिवार ने उसका स्मृति स्थल बनाने का निर्णय लिया है. परिवार का मानना है कि इससे आने वाली पीढ़ियां भी टीटी को याद रख सकेंगी और उसके साथ बिताए गए खूबसूरत पलों को संजोया जा सकेगा. पशु-पक्षियों के प्रति इतना गहरा प्रेम और समर्पण विरले ही देखने को मिलता है. पारशिवनी की यह घटना केवल एक पालतू पोपट की मौत की कहानी नहीं, बल्कि इंसान और जीव-जंतुओं के बीच बनने वाले आत्मीय संबंधों की संवेदनशील मिसाल बन गई है. क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों को भावुक भी कर रही है. यह घटना दर्शाती है कि प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि पशु-पक्षी भी परिवार का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं.

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