11 हजार पन्नों का आरोपपत्र दाखिल, 1199 संदिग्धों पर शिकंजा
160 करोड़ का शालार्थ आईडी घोटाला मामले में

नाशिक/दि.2– महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग को झकझोर देने वाले बहुचर्चित शालार्थ आईडी घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. विशेष जांच दल (एसआईटी) की पड़ताल में सामने आया है कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच फर्जी शालार्थ आईडी के माध्यम से शासन को करीब 160 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया. मामले की जांच कर रही एसआईटी ने बुधवार को नाशिक न्यायालय में 11 हजार पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है. इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों, संस्थाचालकों और अन्य संबंधित लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं था, बल्कि सुनियोजित तरीके से शासकीय वेतन और अनुदान राशि की निकासी के लिए फर्जी शालार्थ आईडी तैयार कर शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया. जांच में सामने आया है कि यह गड़बड़ी लंबे समय तक विभिन्न स्तरों पर जारी रही, जिसके कारण सरकारी खजाने को भारी नुकसान उठाना पड़ा.
* राज्यभर में 16 मामले दर्ज
इस बहुचर्चित घोटाले से जुड़े मामलों में महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में अब तक 16 अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं. आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की टीम ने मामले में कार्रवाई करते हुए पूर्व शिक्षा उपसंचालक नितीन उपासनी, राहुल पवार और किरण पाटील को गिरफ्तार किया है. हालांकि जांच अधिकारियों का मानना है कि अब तक सामने आए तथ्य घोटाले का केवल एक हिस्सा हैं और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं.
* 1199 लोगों को बनाया गया आरोपी
एसआईटी द्वारा दाखिल आरोपपत्र में शिक्षा विभाग से जुड़े 1199 संदिग्धों की भूमिका संदिग्ध और दोषपूर्ण बताई गई है. इनमें शिक्षा विभाग के अधिकारी, संस्थाचालक, शिक्षक, मुख्याध्यापक, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं. जांच में पाया गया कि फर्जी शालार्थ आईडी तैयार करने, उन्हें मंजूरी दिलाने और उसके आधार पर आर्थिक लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर मिलीभगत की गई. आरोपपत्र में इन सभी की भूमिका का विस्तृत उल्लेख किया गया है.
* जांच निर्णायक चरण में
11 हजार पन्नों के विशाल आरोपपत्र के न्यायालय में दाखिल होने के साथ ही मामले की जांच अब महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. जांच एजेंसियां अब उन अन्य संदिग्ध व्यक्तियों और अधिकारियों पर फोकस कर रही हैं, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए हैं. सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में कई और लोगों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है. जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की मंजूरी प्रक्रिया और विभागीय जिम्मेदारियों की भी गहन पड़ताल कर रही हैं.
* शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
घोटाले के आकार और आरोपपत्र में शामिल लोगों की संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. चार्जशीट दाखिल होने के बाद कई अधिकारियों और संस्थाचालकों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है. यदि न्यायालय में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.शिक्षा क्षेत्र की पारदर्शिता और सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर यह मामला राज्य के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में से एक माना जा रहा है. अब सबकी नजर न्यायालयीन प्रक्रिया और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है. यह मामला शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसकी जांच अभी भी जारी है.





