पीओपी गणेश प्रतिमाओं को पिछले वर्ष जैसी छूट देने की मांग

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से की अपील

मुंबई/दि.2– आगामी गणेशोत्सव 2026 को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट से प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर पिछले वर्ष जैसी छूट जारी रखने की मांग की है. सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि छह फीट से ऊंची प्रतिमाओं को प्राकृतिक जलस्रोतों में तथा छह फीट से कम ऊंचाई वाली प्रतिमाओं को कृत्रिम तालाबों में विसर्जित करने की अनुमति इस वर्ष भी दी जाए. यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित जोशी द्वारा दायर याचिका के संदर्भ में सुनवाई के दौरान सामने आया.
याचिका में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बदली हुई नीति तथा राज्य सरकार द्वारा 1 अगस्त 2025 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ के समक्ष हुई. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि पहले से निर्मित और संग्रहित पीओपी प्रतिमाओं के निपटान के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी समिति की सिफारिशों पर चरणबद्ध तरीके से अमल किया जा रहा है. साथ ही मुंबई, नवी मुंबई, पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और नाशिक समेत 7-8 शहरों में गणेश प्रतिमाओं के पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिगं) की परियोजना शुरू करने की योजना है. इसलिए पिछले वर्ष की व्यवस्था को इस वर्ष भी लागू रखने की अनुमति दी जाए.
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मिहिर देसाई ने सरकार की मांग का विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर वर्ष किसी न किसी कारण से नियमों के क्रियान्वयन में देरी करती है और लगातार समय बढ़ाने की मांग करती है. यह पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, इसलिए किसी भी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं दी जानी चाहिए. सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि क्या शाडू मिट्टी की प्रतिमाओं के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री की कमी है?
इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई कमी नहीं है. हालांकि मूर्तिकार संगठनों की ओर से अधिवक्ता उदय वारुंजीकर ने अदालत को बताया कि शाडू मिट्टी से बहुत बड़ी प्रतिमाएं बनाना तकनीकी रूप से कठिन है. बड़ी प्रतिमाओं में दरारें पड़ने और दस दिनों तक सुरक्षित न रहने की संभावना रहती है. साथ ही यह श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा विषय है. मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है. अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आगामी निर्णय पर टिकी हैं, जो इस वर्ष के गणेशोत्सव में पीओपी प्रतिमाओं के विसर्जन की दिशा तय करेगा.

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