अण्णा हजारे की हुंकार के बाद सरकार बैकफुट पर

सूचना अधिकार कानून में विवादित संशोधनों पर रोक

मुंबई./दि.2- महाराष्ट्र सरकार द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत लागू किए गए विवादित संशोधनों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. वरिष्ठ समाजसेवी अण्णा हजारे की ओर से आंदोलन और अनशन की चेतावनी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हस्तक्षेप से राज्य सूचना आयोग ने 12 जून को जारी संशोधित नियमों को स्थगित करने का निर्णय लिया है. इस फैसले को आरटीआई कार्यकर्ताओं और पारदर्शिता के पक्षधर संगठनों की बड़ी जीत माना जा रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने 12 जून को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 से संबंधित नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए थे. इन बदलावों के तहत सूचना आवेदन शुल्क बढ़ाने, अपील शुल्क लागू करने, आवेदन की शब्द सीमा तय करने तथा एक आवेदन में केवल एक ही विषय पर जानकारी मांगने जैसी शर्तें जोड़ी गई थीं. इन संशोधनों को लेकर सामाजिक संगठनों और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने तीव्र विरोध जताया था.
* अण्णा हजारे ने जताई थी कड़ी आपत्ति
आरटीआई कानून में किए गए संशोधनों को लेकर अण्णा हजारे ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि सूचना का अधिकार नागरिकों का बुनियादी अधिकार है और इसे राजस्व वसूली का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार इन बदलावों को वापस नहीं लेती है तो वे आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाएंगे. अण्णा हजारे की आपत्ति के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वयं मामले में हस्तक्षेप किया. मुख्यमंत्री ने राज्य सूचना आयोग को पत्र लिखकर सुझाव दिया कि इस विषय पर अन्ना हजारे सहित संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा किए बिना कोई अंतिम निर्णय लेना उचित नहीं होगा. मुख्यमंत्री के पत्र के बाद राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त ने संशोधित नियमों को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया.
* क्या थे विवादित संशोधन?
सरकार द्वारा जारी संशोधित नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें सूचना आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये करना. दस्तावेजों की प्रति शुल्क 2 रुपये प्रति पृष्ठ से बढ़ाकर 5 रुपये करना. एक आवेदन में केवल एक विषय पर ही जानकारी मांगने की अनुमति. आवेदन की शब्द सीमा 150 शब्द निर्धारित करना. फोटो पहचान पत्र संलग्न करना अनिवार्य करना. प्रथम अपील के लिए 50 रुपये तथा द्वितीय अपील के लिए 100 रुपये शुल्क लागू करना. एक ही विषय पर बार-बार आवेदन करने पर उसे निरस्त करने का अधिकार. व्यक्तिगत जानकारी मांगने के लिए बड़े सार्वजनिक हित को सिद्ध करना अनिवार्य करना. ई-मेल, ऑनलाइन और यूपीआई के माध्यम से आवेदन व शुल्क भुगतान की सुविधा देना. सुनवाई में बार-बार अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करने का प्रावधान आदि का समावेश था. इन नियमों को लेकर कार्यकर्ताओं का कहना था कि इससे आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना महंगा और जटिल हो जाएगा, जिससे आरटीआई कानून की मूल भावना प्रभावित होगी.
* कार्यकर्ताओं ने फैसले का किया स्वागत
राज्य सूचना आयोग द्वारा संशोधित नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद आरटीआई कार्यकर्ताओं ने राहत व्यक्त की है. उनका कहना है कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे प्रभावी माध्यम है तथा इसके उपयोग को कठिन बनाने वाले किसी भी कदम का विरोध किया जाएगा. सूत्रों के अनुसार अब सरकार, सूचना आयोग और अन्ना हजारे सहित विभिन्न पक्षों के बीच चर्चा के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल संशोधित नियमों पर रोक लगने से आरटीआई कानून के मौजूदा प्रावधान यथावत लागू रहेंगे.

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