मानसून सत्र में किसानों को बड़ी राहत

खेती के लिए गौण खनिज रॉयल्टी मुक्त

* महिलाओं को मिलेगा ‘स्वतंत्र किसान’ का कानूनी दर्जा                                                                                                        मुंबई/दि.2-महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को किसानों के हित में दो महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले लिए गए. राज्य सरकार ने खेती से जुड़े कार्यों के लिए आवश्यक गौण खनिज (मुरूम, गिट्टी, मिट्टी आदि) को रॉयल्टी मुक्त करने की घोषणा की है. वहीं, कृषि क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं को स्वतंत्र किसान के रूप में कानूनी मान्यता देने के लिए ‘महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक’ भी विधानसभा में पेश किया गया.
* खेती के कार्यों के लिए गौण खनिज पर नहीं लगेगी रॉयल्टी
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा करते हुए कहा कि किसानों को खेतों के रास्तों की मरम्मत तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए आवश्यक गौण खनिज बिना रॉयल्टी उपलब्ध कराया जाएगा. इससे किसानों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और कृषि कार्यों को गति मिलेगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कृषि कार्यों के लिए होगी. गौण खनिज का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा.
* 15 दिन की मिलेगी अनुमति
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को संबंधित मंडल अधिकारी के पास आवेदन करना होगा. आवेदन स्वीकृत होने के बाद किसानों को 15 दिनों की अधिकृत अनुमति दी जाएगी. इस अवधि में वे खेती से जुड़े आवश्यक कार्यों के लिए गौण खनिज का उपयोग कर सकेंगे. इसके अलावा कृषि कार्यों और गौण खनिज के परिवहन के लिए उपयोग किए जाने वाले किसानों के ट्रैक्टरों पर किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का भी आश्वासन दिया गया है.
* सर्वदलीय नेताओं ने किया स्वागत
सरकार के इस फैसले का सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने स्वागत किया. भाजपा विधायक गोपीचंद पडळकर ने इसे किसानों के हित में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय बताया, जबकि कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और खेती की लागत कम होगी.
* महिलाओं को मिलेगा ‘स्वतंत्र किसान’ का दर्जा
विधानसभा में पेश किए गए महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक को भी ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. राज्य में कृषि क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं, लेकिन अब तक उन्हें कानूनी रूप से किसान का दर्जा प्राप्त नहीं था. नए विधेयक के तहत महिलाओं को स्वतंत्र किसान के रूप में पहचान दी जाएगी, जिससे वे सरकारी योजनाओं और कृषि संबंधी सुविधाओं का सीधे लाभ उठा सकेंगी.         * विधेयक की प्रमुख विशेषताएं
महिला किसानों को स्वतंत्र कानूनी पहचान मिलेगी. महिला किसानों का अलग डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाएगा. उनके विकास और सशक्तिकरण के लिए ‘महाराष्ट्र राज्य महिला किसान निधि’ की स्थापना की जाएगी. कृषि योजनाओं, अनुदानों और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ सीधे महिला किसानों तक पहुंचेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका को औपचारिक मान्यता मिलेगी.
* कृषि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन
मानसून सत्र में लिए गए इन दोनों फैसलों को राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. एक ओर खेती की लागत कम करने की दिशा में कदम उठाया गया है, वहीं दूसरी ओर लाखों महिला कृषकों को अधिकार और पहचान दिलाने की पहल की गई है. कृषि संगठनों और किसान प्रतिनिधियों ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए इन्हें किसानों और महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया है.

 

Back to top button