एकल अभिभावक महिलाओं ने मनाई ऐतिहासिक वट पूर्णिमा

समाज को नई दिशा

अंजनगांव सुर्जी/दि.4– वट पूर्णिमा का पर्व परंपरागत रूप से सुहागिन महिलाओं का त्योहार माना जाता है. वर्षों से समाज में यह धारणा रही कि विधवा एवं एकल अभिभावक महिलाएं वट पूर्णिमा की पूजा नहीं कर सकतीं? इसी सामाजिक रूढ़ि को सकारात्मक चुनौती देते हुए सेवा दीप मल्टीपर्पज फाउंडेशन एवं पतंजलि महिला योग समिति के संयुक्त तत्वावधान में एकल अभिभावक महिलाओं के लिए विशेष वट पूर्णिमा पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने पहली बार विधिवत वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर वट पूर्णिमा का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया. वर्षों बाद उनके चेहरों पर झलकती खुशी, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतोष ने पूरे वातावरण को भावुक और प्रेरणादायी बना दिया. उपस्थित लोगों ने इस पहल को महिलाओं के सम्मान, समानता और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं सराहनीय कदम बताया. कार्यक्रम की प्रमुख संयोजिका डॉ. संगीता गोविंद मेण ने कहा कि एकल अभिभावक के रूप में जीवन व्यतीत करने वाली महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. उनकी पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है. इसी भावना के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, ताकि ऐसी महिलाओं को भी प्रत्येक पर्व और उत्सव मनाने का समान अधिकार एवं सम्मान मिल सके.
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मीना अंबुलकर, शुभांगी पटेल, संगीता ऊके, वर्षा सायवान, संगीता दुधे, शोभा थोरात एवं शारदा घोगरे का विशेष सहयोग रहा. वहीं सुरेखा धमाले ने मार्गदर्शन प्रदान किया. इस अवसर पर नीता मोगरे, अनिता सोनपरोते, दीपाली धरमठोक, छाया बागडे, अर्चना सुरजुसे, दीपा मेण, संगीता पिंगे, कविता किंचबरे, कीर्ति केदार एवं शोभा येऊल सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं. पतंजलि योग समिति एवं लोकजागर परिवार की ओर से कार्यक्रम को शुभकामनाएं देते हुए इस सामाजिक पहल की सराहना की गई. इस अनूठे आयोजन ने वर्षों पुरानी सामाजिक रूढ़ियों को सकारात्मक दिशा देते हुए एकल अभिभावक महिलाओं के आत्मसम्मान को नई शक्ति प्रदान की. साथ ही समाज में समानता, सम्मान, महिला सशक्तिकरण और समावेशिता का प्रेरणादायी संदेश भी दिया.

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