भू-माफियाओं पर सरकार का बड़ा प्रहार

बिना किसान प्रमाण के नहीं खरीद सकेंगे जमीन

* राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने दी जानकारी
* धुले भूमि घोटाले की एसपी स्तर से जांच, फर्जी वारिस रिकॉर्ड होंगे रद्द
मुंबई/दि.8- महाराष्ट्र में कृषि भूमि खरीद-फरोख्त को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। विधानसभा में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने स्पष्ट घोषणा की कि राज्य में जमीन खरीदने के लिए संबंधित व्यक्ति का किसान होना अनिवार्य रहेगा। वैध किसान प्रमाण प्रस्तुत किए बिना किसी को भी कृषि भूमि खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विधानसभा में धुले जिले के वडजाई, पिंपरी और नरवहाल क्षेत्र में कथित भूमि घोटाले का मुद्दा उठने पर मंत्री बावनकुले ने कहा कि पूरे राज्य में जमाबंदी आयुक्त के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड का व्यापक मैपिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके जरिए फर्जी किसानों और भू-माफियाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाएगा।
* धुले भूमि घोटाले की होगी उच्चस्तरीय जांच
राजस्व मंत्री बावनकुले ने बताया कि धुले जिले में सामने आए भूमि घोटाले की जांच विभागीय आयुक्त के नेतृत्व में विशेष टीम करेगी। साथ ही पूरे मामले की जांच पुलिस अधीक्षक (एसपी) स्तर पर कराई जाएगी। प्रारंभिक जांच में कुछ मामलों में खरीदारों के किसान होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले हैं। तहसीलदार की मुहर वाले कुछ दस्तावेजों के भी संदिग्ध होने की आशंका जताई गई है। सरकार ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी करने तथा अवैध भूमि व्यवहार करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
* 44 मूल भूखंडधारकों को मिलेगा न्याय
मंत्री बावनकुले ने बताया कि संबंधित भूमि पहले ही वैध रूप से जयप्रकाश गृहनिर्माण संस्था के 44 सदस्यों के नाम हस्तांतरित हो चुकी थी। इसके बावजूद वर्ष 2010 में मूल मालिकों के वारिसों ने कथित रूप से राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से दोबारा अपने नाम वारिस दर्ज कराकर भूमि का पुनः विक्रय कर दिया। उन्होंने कहा कि एक बार भूमि विक्रय होने के बाद पूर्व मालिकों के वारिसों के नाम दर्ज करने का कोई कानूनी आधार नहीं था। सरकार इस मामले की विशेष पुनर्समीक्षा कराएगी तथा वर्ष 2010 में दर्ज की गई विवादित वारिस नोंद रद्द कर मूल 44 सदस्यों के अधिकार बहाल किए जाएंगे। भूमि क्षेत्रफल में किए गए कथित अवैध संशोधनों की भी जांच कर उन्हें निरस्त किया जाएगा।
* अब रजिस्ट्रेशन के समय होगी तत्काल जांच
राज्य सरकार ने भूमि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सभी मुद्रांक अधिकारियों को जमाबंदी आयुक्त के डेटाबेस से सीधे जोड़ने का निर्णय लिया है। अब जमीन की रजिस्ट्री कराने आने वाले व्यक्ति की भूमि संबंधी पूरी जानकारी तत्काल उपलब्ध हो सकेगी। यदि कोई बाहरी व्यक्ति या संदिग्ध खरीदार किसान होने का दावा करता है, तो उसकी पात्रता की जांच होने तक भूमि पंजीयन रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से फर्जी किसान बनकर जमीन खरीदने वाले गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगेगा। राजस्व मंत्री बावनकुले ने कहा कि राज्य सरकार कृषि भूमि की सुरक्षा और वास्तविक किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा भूमि घोटालों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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