महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी फिर टली
आयकर डेटा के इंतजार में अटकी योजना

* महायुति सरकार ने केंद्र से मांगी जानकारी
* आयकरदाता किसानों को लाभ देने पर भी संशय
* विपक्ष और किसान संगठनों ने साधा निशाना
मुंबई/दि.10- महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना’ की प्रतीक्षा कर रहे लाखों किसानों को फिलहाल और इंतजार करना पड़ेगा. राज्य सरकार ने कर्जमाफी योजना के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित रखते हुए केंद्र सरकार से आयकर संबंधी डेटा मांगा है. इस डेटा के आधार पर पात्र किसानों की श्रेणी तय की जाएगी, जिसके बाद ही कर्जमाफी की प्रक्रिया शुरू होगी.
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार यह तय करने पर विचार कर रही है कि आयकर भरने वाले किसानों को कर्जमाफी का लाभ दिया जाए या नहीं. यदि आयकरदाताओं को योजना से बाहर रखा गया, तो बड़ी संख्या में किसान लाभ से वंचित हो सकते हैं. इस संभावना ने किसान संगठनों और विपक्षी दलों की चिंता बढ़ा दी है.
* डेटा के बिना नहीं होगी पात्रता तय
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार से आयकरदाताओं का डेटा मांगा गया है. यह जानकारी प्राप्त होने में कम से कम पांच से छह दिन लग सकते हैं. हालांकि, इससे पहले ‘लाडकी बहन योजना’ के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयकर विभाग से मांगा गया डेटा कई महीनों बाद उपलब्ध हुआ था. ऐसे में किसान कर्जमाफी के लिए मांगी गई जानकारी कब तक मिलेगी, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि डेटा मिलने के बाद किसानों का वर्गीकरण किया जाएगा और उसके आधार पर लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार होगी. इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही कर्जमाफी की घोषणा को जमीन पर उतारा जाएगा.
* क्या है कर्जमाफी योजना?
महायुति सरकार ने विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों से कर्जमाफी का वादा किया था. इसी के तहत ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर शेतकरी कर्जमाफी योजना 2026’ की घोषणा की गई थी. योजना के अनुसार, किसानों को 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण की माफी दी जाएगी. नियमित रूप से ऋण चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रुपये तक का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा. वन टाइम सेटलमेंट का विकल्प भी उपलब्ध कराया जाएगा. सरकार का दावा है कि योजना से राज्य के 56 लाख किसानों को लाभ मिलेगा.
बता दे कि, सरकार ने पहले 30 जून तक कर्जमाफी लागू करने का आश्वासन दिया था. बाद में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने कहा था कि 5 जुलाई के बाद जल्द ही किसानों को राहत मिल जाएगी. लेकिन अब आयकर डेटा की प्रक्रिया के कारण योजना एक बार फिर आगे खिसकती नजर आ रही है.
* किसान संगठनों में नाराजगी
कर्जमाफी में लगातार हो रही देरी को लेकर किसान संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. हाल ही में किसान नेता रविकांत तुपकर और अन्य संगठनों ने आंदोलन कर सरकार पर दबाव बनाया था. तुपकर ने कहा कि विधानसभा चुनाव में सरकार ने किसानों से ‘सातबारा कोरा’ (कर्जमुक्ति) का वादा किया था, लेकिन डेढ़ से दो वर्ष बीत जाने के बाद भी कर्जमाफी को लेकर केवल तारीखें दी जा रही हैं. उन्होंने कहा, यदि सरकार के पास आवश्यक डेटा नहीं था तो पहले 30 जून और फिर 5 जुलाई की समय-सीमा क्यों घोषित की गई? किसानों का सरकार पर से विश्वास उठता जा रहा है. जटिल शर्तें हटाकर सभी किसानों की सरसकट कर्जमाफी की जानी चाहिए.
* विपक्ष ने भी घेरा सरकार को
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व विधायक नाना पटोले ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार तारीखें घोषित कर रही है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं. पटोले ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों को केवल आश्वासन दिए हैं, जबकि वास्तविक राहत अब तक नहीं पहुंची है. उन्होंने कहा, सरकार किसानों के मुंह पर पत्ते फेर रही है. ऐसा लग रहा है कि केवल 25 प्रतिशत किसानों को लाभ मिलेगा और 75 प्रतिशत किसान योजना से बाहर रह जाएंगे. हमारी मांग है कि बिना किसी भेदभाव के सभी किसानों को कर्जमाफी दी जाए.
* शेतकरी संगठनों का दबाव बढ़ने की संभावना
कर्जमाफी को लेकर पहले ही कई किसान संगठन आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं. यदि आयकरदाता किसानों को योजना से बाहर रखने का निर्णय लिया जाता है, तो सरकार को व्यापक विरोध का सामना करना पड़ सकता है. फिलहाल राज्य के लाखों किसान केंद्र से आयकर डेटा आने और सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन लगातार बढ़ती देरी के कारण किसानों में असंतोष भी बढ़ता जा रहा है और अब सभी की नजरें सरकार की अगली घोषणा पर टिकी हैं.





