राज्य में बोर्ड परिक्षाओं में नकल रोकने किए किए सख्त उपाय

विधायक सुलभा खोडके ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

* शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने दिए कड़े कदमों के संकेत
* अमरावती संभाग के 8 कर्मचारियों पर एफआईआर के आदेश
मुंबई/दि.13– महाराष्ट्र में दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं को पूरी तरह नकलमुक्त और पारदर्शी बनाने की मांग विधानसभा में जोरदार ढंग से उठी. अमरावती की विधायक सुलभा खोडके ने राज्य में परीक्षा केंद्रों पर सामने आए सामूहिक नकल और अन्य अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग की. इस पर जवाब देते हुए राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने बताया कि बारहवीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामने आए विभिन्न गैरप्रकारों के मामलों में 15 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. इनमें सबसे अधिक अमरावती संभाग के 8 कर्मचारियों, नागपुर संभाग के 3, छत्रपति संभाजीनगर संभाग के 3 तथा लातूर संभाग के 1 कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इसके अलावा राज्यभर में लगभग 100 कर्मचारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई भी की गई है.
* राज्य में 1,469 सामूहिक नकल के मामले
विधानसभा में जानकारी देते हुए विधायक सुलभा खोडके ने बताया कि महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाओं के दौरान इस वर्ष 1,469 सामूहिक नकल और अन्य गैरप्रकारों के मामले सामने आए हैं. सबसे चिंताजनक स्थिति अमरावती संभाग की रही, जहां 650 मामले दर्ज हुए. इसके बाद छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 501 मामले सामने आए. इतने बड़े पैमाने पर नकल के मामले सामने आने से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं.
* सीसीटीवी और कॉपीमुक्त अभियान के बावजूद अनियमितताएं
विधायक खोडके ने कहा कि राज्य शिक्षा मंडल द्वारा हर वर्ष कॉपीमुक्त अभियान चलाया जाता है तथा अधिकांश परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर नकल और अन्य अनियमितताएं सामने आना गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने सरकार से पूछा कि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने, सामूहिक नकल पर रोक लगाने तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाएंगे.
* दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई
शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने सदन को बताया कि परीक्षा प्रक्रिया में लापरवाही या गैरप्रकारों में संलिप्त पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि विभिन्न मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं और भविष्य में भी किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. मंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है और नकल माफिया या गैरप्रकारों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे.
* नियंत्रण एवं समन्वय समितियों का पुनर्गठन
राज्य सरकार ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. इसके तहत जिला स्तर पर कार्यरत नियंत्रण एवं समन्वय समितियों का पुनर्गठन किया जाएगा. साथ ही, परीक्षा केंद्रों की निगरानी करने वाली दक्षता समितियों की जिम्मेदारियां और अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएंगे, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
* अमरावती संभाग पर विशेष नजर
राज्य में सर्वाधिक 650 सामूहिक नकल के मामले अमरावती संभाग में सामने आने के कारण शिक्षा विभाग की विशेष नजर अब इस क्षेत्र पर रहेगी. अधिकारियों का मानना है कि परीक्षा केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने, तकनीकी नियंत्रण बढ़ाने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा.
* परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे सामूहिक नकल के मामले शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं. सरकार द्वारा एफआईआर, निलंबन और निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे कदम उठाए गए हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और नकलमुक्त बनाने के लिए प्रशासन, विद्यालयों, शिक्षकों और अभिभावकों को भी समान रूप से जिम्मेदारी निभानी होगी. विधानसभा में हुई इस चर्चा के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार आगामी दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए घोषित उपायों को कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है.

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