डॉ. विशाल काले के खिलाफ होगी विभागीय जांच, दंड देने से पहले आमसभा में रखी जाएगी रिपोर्ट
मनपा की आमसभा में जमकर छाया रहा जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों का मामला

* स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रतिभा आत्राम भी विभागीय जांच के दायरे में
* पहली बार मनपा के सदन में किसी मुद्दे पर सर्वदलिय पार्षदों की दिखी अभूतपूर्व एकता
* सत्तापक्ष व विपक्ष के पार्षदों ने नागरिकों को हो रही तकलिफों पर दिखाई एकजुट प्रतिबध्दता
* महापौर तेजवानी ने नियम 56 (1) के तहत जांच के आदेश जारी किए, जल्द रिपोर्ट देने कहा
अमरावती/दि.15- आज मनपा की आमसभा में जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों का मामला जमकर गुंजा तथा विगत कई दिनों से नागरिकों को हो रही परेशानियों और दिक्कतों की ओर पार्षदों द्वारा मनपा प्रशासन का ध्यान दिलाते हुए इस मामले में जरूरी इंतजाम करने एवं गडबडियों को दूर करते हुए सुचारू व्यवस्था करने की मांग उठाई गई. साथ ही पूरे सदन का गुस्सा मनपा के स्वास्थ्य व चिकित्सा अधिकारी डॉ. विशाल काले व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रतिभा आत्राम के खिलाफ विभागीय जांच करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाने की मांग भी उठाई गई. खास बात यह रही कि इस मुद्दे पर सर्वदलिय पार्षदों की जबरदस्त एकजुटता दिखाई दी और पूरे सदन ने इस मांग का जमकर समर्थन भी किया. हालांकि मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे व नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले सहित सभी गटनेताओं ने इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक मामला बताया. पश्चात इस विषय पर हुई चर्चा के अंत में पिठासीन सभापति व महापौर श्रीचंद तेजवानी ने नियम 56 (1) के तहत पूरे मामले की जांच पडताल करते हुए सदन के सामने विस्तृत जांच रिपोर्ट अगली आमसभा के पहले रखने का निर्देश मनपा प्रशासन को दिया.
आज मनपा की आमसभा का कामकाज जारी रहते समय विभिन्न दलों से वास्ता रखनेवाले पार्षदों द्वारा जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों में बडे पैमाने पर हो रही गडबडियों तथा इसकी वजह से आम नागरिकों को हो रही दिक्कतों का मुद्दा बडे पुरजोर तरीके से सदन में उठाया गया. पार्षदों का कहना रहा कि, अमरावती मनपा द्वारा जारी किये गए 1709 जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों में से 112 मामलों का मनपा के पास कोई रिकॉर्ड ही नहीं है. जिसके लिए पूरी तरह से स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विशाल काले व डॉ. प्रतिभा आत्राम को जिम्मेदार कहा जा सकता है. इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ इससे पहले भी बडे पैमाने पर गडबडियों को लेकर शिकायतें प्राप्त होती रही. ऐसे में बेहद जरूरी है कि, इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच करते हुए निलंबन की कार्रवाई भी की जाए.
इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनपा के सभागृह नेता चेतन गावंडे, नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले, गटनेता डॉ. राजेंद्र तायडे, स्वीकृत पार्षद अनिल अग्रवाल, मिलींद चिमोटे व एड. प्रशांत देशपांडे, पार्षद बबलू शेखावत, प्रशांत वानखडे, भोजराज काले व मनिष बजाज सहित लगभग सभी गटनेताओं व पार्षदों ने कहा कि, मनपा के जन्म-मृत्यू विभाग के निबंधक व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विशाल काले एवं उपनिबंधक डॉ. प्रतिभा आत्राम की लापरवाही व कोताही की वजह से अमरावती शहरवासियों को काफी तकलिफों व दिक्कतों का सामना करना पड रहा है. साथ ही इन दोनों अधिकारियों द्वारा की गई गडबडियों की वजह से पूरे राज्य में अमरावती मनपा का नाम खराब भी हुआ है. जिसके चलते इन दोनों अधिकारियों को निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जाए.
इस विषय पर हो रही चर्चा के दौरान मनपा के सभागृृह नेता चेतन गावंडे ने कहा कि, वे इस मामले की जांच के पूरी तरह से पक्षधर है. परंतु यह प्रशासकीय मुद्दा रहने के चलते इस पर प्रशासन को ही निर्णय लेना होगा. जिस पर मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने कहा कि, सन 1992 के बाद से मनपा के इतिहास में किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के संबंधित प्रशासकीय विषय दूसरी बार सामने आया है. इससे पहले तत्कालिन शहर अभियंता मेश्राम के खिलाफ कोर्ट के आदेश पर विभागीय जांच हुई थी. वहीं सभागृह में किसी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच को लेकर निर्णय लेने का यह पहला मामला है. इस समय नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने उनके ही प्रभाग में रहनेवाले और अब तक चार बार मनपा का चुनाव लड चुके व्यक्ती के जन्म प्रमाणपत्र में चूक रहने और उस व्यक्ती के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज होने की ओर भी ध्यान दिलाया.
इस समय कांग्रेस के मनपा पार्षद बबलू शेखावत ने कहा कि, अमरावती मनपा में भाजपा नेता व पूर्व सांसद किरीट सोमैया की वजह से सारी गडबडियां हुई है और मनपा की ओर से जारी किए गए 1709 प्रमाणपत्रों में से 504 प्रमाणपत्रों धारकों के खिलाफ अपराधिक मामले दर्ज हुए है. वहीं खास बात यह भी है कि, मनपा की ओर से जारी किए गए 112 जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों का खुद मनपा में ही कहीं कोई रेकॉर्ड नहीं है. ऐसे में पूरे मामले की सघन जांच होना बेहद जरूरी है. इसके अलावा इस चर्चा में हिस्सा लेने वाले अन्य सभी गटनेताओं व पार्षदों का यह भी कहना रहा कि, जितनी अधिक गडबडी अमरावती मनपा में नहीं है. उससे कई अधिक गडबडी जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्रों को लेकर तहसीलदार कार्यालय की ओर से हुई है. क्योंकि तहसीलदार कार्यालय की ओर से एफिडेविट के आधार पर जारी विलंबित प्रमाणपत्रों के आधार पर ही मनपा द्वारा जन्म-मृत्यू प्रमाणपत्र जारी किए गए थे. ऐसे में इस पूरे मामले की बेहद सघन व निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए.
सदन में सर्वदलिय पार्षदों की मांग और भावनाओं को ध्यान में रखते हुए पीठासीन सभापति व महापौर श्रीचंद तेजवानी ने मनपा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विशाल काले व डॉ. प्रतिभा आत्राम के खिलाफ नियम 56 (1) के तहत विभागीय जांच करने और अगली आमसभा से पहले जांच रिपोर्ट को सदन के सामने प्रस्तुत करने का निर्देश जारी किया. इस समय स्वीकृत पार्षद व पूर्व महापौर मिलींद चिमोटे का कहना रहा कि, यद्यपि इस मामले में मनपा प्रशासन द्वारा जांच अधिकारी की नियुक्ती करते हुए निश्चित तौर पर जल्द से जल्द जांच की कार्रवाई की जाएगी. इसमें कोई संदेह नहीं है. लेकिन जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने से पहले जांच रिपोर्ट को मनपा के सदन में सभी पार्षदों के सामने रखा जाना चाहिए. पार्षद चिमोटे की इस मांग को भी सदन के पटल पर स्वीकार किया गया.
* सरकारी जमिनों पर अतिक्रमण का मुद्दा भी गूंंजा
आज की आमसभा में मनपा पार्षद अनिल अग्रवाल ने अमरावती महानगर क्षेत्र में कई स्थानों पर सरकारी जमिनों पर रहनेवाले अतिक्रमण के मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाया और कहा कि, ऐसे अतिक्रमणों की वजह से शहर के कई क्षेत्रों में विकास कार्य रूके पडे है. इस समय जुनी वस्ती बडनेरा के चमननगर क्षेत्र से होकर गुजरनेवाले रिंग रोड की जमिन पर रहनेवाले अतिक्रमण का उदाहरण देते हुए पार्षद अनिल अग्रवाल ने कहा कि, विकास कामों हेतु प्रयुक्त होनेवाली सरकारी जमिनों पर रहनेवाले अतिक्रमणों को हटाकर वहां पर रहनेवाले लोगों को कई और स्थलांतरीत करने हेतु सरकार द्वारा योजना चलाते हुए दिसंबर 2026 तक समय तय किया गया है. परंतु जिन स्थानों पर अतिक्रमण धारकों को स्थलांतरीत व पुनर्वसित किया जाना है, वहां पर मूलभूत सेवा व सुविधाओं का सर्वथा अभाव है. जिसके चलते अतिक्रमणधारक अब भी सरकारी जमिनों पर जमे हुए है. जिन्हें यदि दिसंबर 2026 तक वहां से नहीं हटाया जाता है तो उनके द्वारा किए गए अतिक्रमण को नियमित करना पडेगा. जिसके चलते सहायक संचालक नगर रचना विभाग द्वारा प्रभावी तरीके से काम किए जाने की जरूरत है. इस समय पार्षद अनिल अग्रवाल ने इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया कि, अमरावती मनपा में नगर रचना विभाग के सहायक संचालक पद का अतिरिक्त कार्यभार बुलढाणा की सहाय्यक संचालक नगर रचना श्रीमती घाटे को दिया गया है. जो अमूमन बुलढाणा में ही रहती है और आज पहली बार मनपा की आमसभा में दिखाई दी है. ऐसे में बेहद जरूरी है कि, सहायक संचालक नगर रचना विभाग में पूर्णकालिक व नियमित अधिकारी की नियुक्ती की जाए.
‘उन’ 47 ठेका नियुक्त कर्मचारियों को दोबारा लिया जाएगा मनपा की सेवा में
आज हुई मनपा की आमसभा में नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने मनपा की सेवा से हटाए गए 47 ठेका नियुक्त कर्मचारियों को दोबारा मनपा की सेवा में लिए जाने का मुद्दा उठाया. विगत करीब 15-20 वर्षों से मनपा की सेवा में रहनेवाले इन 47 ठेका नियुक्त कर्मचारियों को एमएससीआयटी सहित अन्य संगणकीय पात्रता व योग्यता नहीं रहने के चलते मनपा की सेवा से हटा दिया गया था. जिसकी वजह से उन 47 ठेका नियुक्त कर्मचारियों के समक्ष बेरोजगारी व भूखमरी का संकट पैदा हो गया था. ऐसे में मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने मनपा के कामकाज का पूरी तरह से ज्ञान व अनुभव रहनेवाले उन 47 कर्मचारियों को दोबारा मनपा की सेवा में लिए जाने का विषय सदन के सामने रखा. जिसे आमसभा में सर्वसम्मती से मंजूरी दी गई.
* ‘अमरावती का इतिहास’ का चौथा खंड भी प्रकाशित होगा
– नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले के प्रस्ताव को सदन ने दी मंजूरी
– सन 83 से 2025 के कालखंड का रहेगा समावेश
– पांच सदस्यीय संपादक मंडल का होगा गठन
आज की आमसभा में मनपा के नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले ने कहा कि, ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व रखनेवाले अमरावती शहर का वर्ष 1983 तक का इतिहास तीन खंडों में प्रकाशित है. ऐसे में अब यह बेहद जरूरी हो चला है कि, सन 1983 से लेकर वर्ष 2025 तक 43 वर्षों के कालखंड का समावेश करते हुए ‘अमरावती का इतिहास’ के चौथे खंड का प्रकाशन किया जाए. ताकि अमरावती के समग्र इतिहास को लिखित तौर पर संरक्षित किया जा सके. नेता प्रतिपक्ष विलास इंगोले द्वारा रखे गए इस प्रस्ताव का सदन ने सर्वसम्मती के साथ समर्थन किया. इसके साथ ही यह तय किया गया कि, अमरावती के इतिहास का चौथा खंड प्रकाशित करने हेतु पांच सदस्यीय संपादक मंडल का गठन किया जाएगा तथा सन 1983 से लेकर वर्ष 2025 के दौरान घटित हुई प्रमुख समसामायीक घटनाओं स गतिविधियों का समावेश करते हुए अमरावती के इतिहास का चौथा खंड प्रकाशित किया जाएगा. इस विषय पर हुई चचार्र् में सभागृह नेता चेतन गावंडे, कांग्रेस के स्वीकृत पार्षद मिलींंद चिमोटे व भाजपा के स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे द्वारा हिस्सा लिया गया.