धामणगांव के जांगड़ा परिवार का प्रेरणादायी अंगदान निर्णय

मरकर भी अमर रहने का संदेश!

* कमलाबाई नथमल जांगड़ा की अंतिम इच्छा परिवार ने की पूरी
* यकृतदान से एक मरीज को मिला नया जीवन
धामणगांव रेलवे/दि.20 – मृत्यु के बाद भी अपने अंगों के माध्यम से किसी दूसरे को नया जीवन देना मानवता की सर्वोच्च सेवा मानी जाती है. इसी भावना का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करते हुए धामणगांव रेलवे के गांधी चौक निवासी श्री पार्थ पद्मावती ज्वेलर्स के संचालक व पूर्व नगर सेवक संजय जांगड़ा परिवार ने अंगदान कर समाज के सामने प्रेरणादायी मिसाल कायम की है.
परिवार की वरिष्ठ सदस्य कमलाबाई नथमल जांगड़ा (70) की लगभग 35 वर्ष पहले व्यक्त की गई अंगदान की इच्छा को उनके निधन के बाद परिवार ने पूरा कर मानवता का अनूठा संदेश दिया. 10 जुलाई को कमलाबाई जांगड़ा को ब्रेन हैमरेज का गंभीर दौरा पड़ने के बाद उन्हें पुणे के बानेर स्थित ज्यूपिटर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उपचार के दौरान चिकित्सकों की समिति ने उन्हें ब्रेन स्टेम डेड घोषित कर दिया. जब उनके स्वस्थ होने की कोई संभावना नहीं रही, तब परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए अंगदान का निर्णय लिया. इसके लिए उनके परिवार के सदस्यों में नथमल जांगड़ा, प्रवीण जांगड़ा, संजय जांगड़ा, पियूष जांगड़ा, भूषण जांगड़ा, अभय जांगड़ा, गौतम जांगड़ा, दिव्यम जांगड़ा, आरव जांगड़ा एवं युहान जांगड़ा ने सभी आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं. इसके बाद कमलाबाई जांगड़ा का यकृत (लीवर) दान किया गया, जिससे एक जरूरतमंद मरीज को नया जीवन मिलने का अवसर प्राप्त हुआ. किसी प्रियजन को खोने का दुःख हर परिवार के लिए असहनीय होता है, लेकिन ऐसे कठिन समय में भी किसी अन्य की जिंदगी बचाने का निर्णय वास्तव में प्रेरणादायी है. जांगड़ा परिवार का कहना है कि अंगदान के माध्यम से अनेक मरीजों को नया जीवन मिल सकता है और अपने प्रियजन का अस्तित्व दूसरों के जीवन में हमेशा जीवित रहता है. कमलाबाई नथमल जांगड़ा के इस प्रेरणादायी निर्णय से समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग इस महान कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे, ऐसी आशा व्यक्त की जा रही है.

* परिवार की भावना
अंगदान मानवता की सर्वोच्च सेवा है. यह निर्णय मृत्यु के मुहाने पर खड़े कई मरीजों को नया जीवन देने की शक्ति रखता है. हमें माँ की अंतिम इच्छा पूरी करने का संतोष है. हमारा आग्रह है कि अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं.
– संजय जांगड़ा, धामणगांव रेलवे.

* अंगदान के दो प्रकार
अंगदान मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है- जीवित व्यक्ति द्वारा अंगदान तथा ब्रेन डेड अथवा मृत व्यक्ति द्वारा अंगदान
जीवित व्यक्ति एक किडनी, लीवर का कुछ हिस्सा या अग्न्याशय (पैंक्रियाज) का कुछ भाग दान कर सकता है. वहीं ब्रेन डेड व्यक्ति का हृदय, लीवर, किडनी, पैंक्रियाज जैसे महत्वपूर्ण अंग जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं. इसके अलावा प्राकृतिक मृत्यु के बाद आंखें, त्वचा, ऊतक (टिश्यू) और हड्डियां भी दान की जा सकती हैं. अंगदान का अर्थ है मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में आशा की नई किरण बनना. इसलिए प्रत्येक नागरिक को अंगदान के प्रति जागरूक होकर इस महान मानव सेवा अभियान से जुड़ना चाहिए, ऐसा चिकित्सकीय विशेषज्ञों का भी आह्वान है.

Back to top button