मेलघाट के 13,500 से अधिक बच्चों की होगी हृदय जांच

‘प्रोजेक्ट देवा’ के तहत मुफ्त उपचार से लेकर सर्जरी तक की व्यवस्था

अमरावती/दि. 22 – मेलघाट के दुर्गम एवं आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट देवा’ (डिटेक्शन, इवैल्यूएशन एंड वाइटल एक्शन फॉर कॉन्जेनिटल हार्ट डिजीज) की शुरुआत की गई है. इस महत्वाकांक्षी अभियान के प्रथम चरण में 49 गांवों के 13,500 से अधिक विद्यार्थियों की हृदय जांच की जाएगी. मुख्यमंत्री जनआरोग्य अभियान के अंतर्गत यह विशेष पहल 23 जुलाई को चिखलदरा में आयोजित ‘छत्रपति शिवाजी महाराज महसूल समाधान शिविर’ के माध्यम से आगे बढ़ाई जाएगी.
इस परियोजना की संकल्पना चिखलदरा नगर परिषद के नगरसेवक आल्हाद कलोती ने प्रस्तुत की थी. महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री तथा अमरावती जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए संबंधित प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभागों को तत्काल अमल में लाने के निर्देश दिए. साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित महसूल समाधान शिविर में इस परियोजना को शामिल करने के भी निर्देश दिए गए.
* समय पर पहचान नहीं होने से बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार जन्मजात हृदय रोगों की समय पर पहचान नहीं होने पर बच्चों के जीवन पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है. कई बार इसके लक्षण सामान्य बीमारी जैसे दिखाई देते हैं, जिसके कारण बीमारी का पता देर से चलता है. इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मेलघाट के प्रत्येक बच्चे तक हृदय जांच, सटीक निदान और मुफ्त उपचार पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
* स्कूलों में पहुंच रही मेडिकल टीमें
परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की चिकित्सा टीमें गांव-गांव और स्कूल-स्कूल जाकर विद्यार्थियों की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच कर रही हैं. प्राथमिक जांच में जिन बच्चों में हृदय संबंधी समस्या की आशंका पाई जाएगी, उन्हें 23 जुलाई को आयोजित विशेष शिविर में बाल हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा 2डी इको, ईसीजी तथा अन्य आवश्यक हृदय परीक्षणों से गुजरना होगा. विशेषज्ञों द्वारा अंतिम निदान के बाद जिन बच्चों को उपचार या सर्जरी की आवश्यकता होगी, उन्हें तत्काल उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाएगा.
* मुफ्त जांच, इलाज और सर्जरी की पूरी व्यवस्था
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उपचार अथवा सर्जरी की आवश्यकता वाले सभी पात्र बच्चों को मुख्यमंत्री वैद्यकीय सहायता निधि, आयुष्मान भारत योजना, महात्मा ज्योतिराव फुले जनआरोग्य योजना तथा अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के माध्यम से पूरी तरह निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी. इसमें जांच, अस्पताल में भर्ती, ऑपरेशन और उपचारोपरांत नियमित फॉलोअप भी शामिल रहेगा.
* अपोलो और नेल्सन अस्पताल की विशेषज्ञ टीम करेगी सहयोग
इस अभियान में मुख्यमंत्री वैद्यकीय सहायता निधि कक्ष, जिला कलेक्टर कार्यालय अमरावती, जिला स्वास्थ्य प्रशासन, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, आदिवासी विकास विभाग, बाल रोग विशेषज्ञ, सरकारी एवं निजी अस्पताल, स्थानीय प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं सहभागी बनी हैं. मुंबई के अपोलो हॉस्पिटल्स तथा नेल्सन हॉस्पिटल के बाल हृदय रोग विशेषज्ञों की विशेष टीम अत्याधुनिक 2डी इको मशीनों, तकनीकी सहायता और विशेषज्ञ चिकित्सा मार्गदर्शन के साथ शिविर में सेवाएं प्रदान करेगी.
* जनप्रतिनिधियों का भी मिल रहा सहयोग
अभियान को मेलघाट के विधायक केवेलराम काले, भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष प्रभुदास भिलावेकर, पूर्व नगराध्यक्ष राजूभाऊ सोमवंशी, भाजपा गटनेता राजेश मांगलेकर तथा भाजपा चिखलदरा शहराध्यक्ष वेदांत शूरपातणे सहित अनेक जनप्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त हो रहा है. जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से इस अभियान को व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है.
* ‘स्क्रीनिंग से सर्जरी’ तक संपूर्ण उपचार श्रृंखला
परियोजना के संकल्पक आल्हाद कलोती ने बताया कि प्रोजेक्ट देवा केवल एक स्वास्थ्य जांच अभियान नहीं, बल्कि स्क्रीनिंग से सर्जरी तक की संपूर्ण उपचार श्रृंखला तैयार करने वाला सर्वसमावेशी उपक्रम है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेळघाट का कोई भी बच्चा समय पर निदान और उपचार से वंचित न रहे. उन्होंने कहा कि यह पहल आदिवासी और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले हजारों बच्चों के लिए जीवनदायी साबित हो सकती है तथा भविष्य में इसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना है.

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