दत्तगिरी महाराज को सीधे न्यायिक हिरासत कैसे?
पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने दागा संतप्त सवाल

* आनंद मठ अत्याचार मामले को बताया बेहद गंभीर
* राज्य सरकार पर भी लगाए बेहद गंभीर आरोप
अमरावती/दि.23- जिले के चांदूर रेलवे स्थित आनंद मठ में कथित लैंगिक शोषण और अत्याचार के मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है. मामले के आरोपी दत्तगिरी जयराम महाराज उर्फ जयकृष्ण रघुनाथ सोनटक्के को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां उसे पुलिस रिमांड (पीसीआर) के बजाय सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एड. यशोमती ठाकुर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार पर आरोपी को बचाने का आरोप लगाया है.
बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री एड. यशोमती ठाकुर ने कहा कि अमरावती की धरती राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज और संत गाडगेबाबा की वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जागरूकता की परंपरा से जुड़ी रही है, लेकिन वर्तमान समय में धर्म के नाम पर ढोंग और अंधविश्वास को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र धारण कर धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने वाले ऐसे तथाकथित बाबाओं को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है. ठाकुर ने कहा कि आरोपी दत्तगिरी महाराज के विभिन्न राजनीतिक नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे, पूर्व सांसद नवनीत राणा तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ उसके फोटो होने की चर्चा है. उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों वाले मामले में पुलिस को आरोपी का रिमांड लेकर गहन पूछताछ करनी चाहिए थी, ताकि अन्य संभावित पीड़ितों और तथ्यों का खुलासा हो सके.
पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर का यह भी कहना रहा कि, यदि आरोपी से पुलिस हिरासत में विस्तार से पूछताछ की जाती तो कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते थे. लेकिन बिना पुलिस रिमांड मांगे सीधे न्यायिक हिरासत दिलाने से संदेह पैदा हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं न कहीं पुलिस पर सरकार का दबाव है और आरोपी को बचाने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
चांदूर रेलवे में इस गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि जांच आगे बढ़ने पर इसी तरह के अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है. कई नागरिकों का मानना है कि यदि आरोपी से पुलिस हिरासत में विस्तृत पूछताछ होती तो कथित रूप से और पीड़ित सामने आ सकते थे. आरोपी को सीधे जेल भेजे जाने के बाद मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
* पुलिस ने आरोपों को किया खारिज
दूसरी ओर, चांदूर रेलवे पुलिस स्टेशन के प्रभारी सुरेश मस्के ने किसी भी राजनीतिक दबाव से इनकार किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी द्वारा प्रारंभिक पूछताछ में ऐसा कोई नया तथ्य सामने नहीं आया, जिसके आधार पर पुलिस रिमांड की आवश्यकता महसूस हो. आवश्यक चिकित्सकीय और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेजा गया. एपीआय मस्के ने कहा कि पुलिस पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं है और मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है.
* जांच पर टिकी निगाहें
आनंद मठ प्रकरण अब केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है. विपक्ष जहां पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं पुलिस का दावा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है. फिलहाल पूरे जिले की नजरें इस मामले की आगे की जांच पर टिकी हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस बहुचर्चित प्रकरण में और कौन से तथ्य सामने आते हैं.
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