रिश्वत मामले में ग्रामसेवक नरेंद्र इंगले बरी

सुनवाई के बाद अदालत ने किया दोषमुक्त

अमरावती/दि.23- नांदगांव खंडेश्वर तहसील के फुबगांव के तत्कालीन ग्रामसेवक नरेंद्र रामदास इंगले को रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों से अमरावती जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है. अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता से ली गई राशि रिश्वत नहीं, बल्कि ग्रामसभा प्रस्ताव की प्रति शुल्क और घरपट्टी (हाउस टैक्स) की बकाया राशि थी, जिसका प्रमाण आधिकारिक रसीदों से मिला. जिला एवं सत्र न्यायाधीश (क्रमांक-3) प्रेमकुमार शर्मा की अदालत ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया. न्यायालय ने दस्तावेजी साक्ष्यों को आधार मानते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ रिश्वत लेने का आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सका.
जानकारी के अनुसार, फुबगांव में ग्रामसेवक के रूप में कार्यरत नरेंद्र इंगले के खिलाफ अमरावती भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायतकर्ता शेख बब्बू शेख इनायत ने आरोप लगाया था कि एपीएल राशन कार्ड को अंत्योदय राशन कार्ड में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ग्रामसभा प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध कराने के बदले इंगळे ने 1,000 रुपये रिश्वत मांगी थी. शिकायत की जांच के बाद एसीबी ने 1 फरवरी 2019 को जाल बिछाकर कार्रवाई की और इंगले के पास से 1,600 रुपये मिलने का दावा किया. इसके आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
* रसीदों ने बदल दी पूरी तस्वीर
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने शिकायतकर्ता, पंच गवाहों और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर रिश्वत लेने का आरोप सिद्ध करने का प्रयास किया. वहीं बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रशांत भेलांडे ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि संबंधित राशि ग्रामसभा प्रस्ताव की प्रति प्राप्त करने के शुल्क तथा घरपट्टी की बकाया रकम थी. बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि राशि प्राप्त करने के तुरंत बाद ग्रामसेवक ने शिकायतकर्ता को पूरी रकम की आधिकारिक रसीदें जारी की थीं. इससे स्पष्ट होता है कि रकम सरकारी शुल्क के रूप में स्वीकार की गई थी, न कि रिश्वत के तौर पर.
* अदालत ने माना बचाव पक्ष का तर्क
अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और रसीदों का परीक्षण करने के बाद माना कि संबंधित राशि का वैध सरकारी लेन-देन से संबंध था. ऐसे में रिश्वत लेने का आरोप प्रमाणित नहीं हो सका. इसके चलते नरेंद्र इंगले को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया. इस मामले में आरोपी की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भेलांडे ने पैरवी की. उन्हें अधिवक्ता रोहित उपाध्याय, अजय भक्त, प्रसाद ढाकुलकर, अजय अमझरे, अभिषेक गव्हाणे और प्रवीण राऊत ने सहयोग दिया.
* रसीद बनी निर्णायक सबूत
मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका उन आधिकारिक रसीदों की रही, जो शिकायतकर्ता को राशि जमा करने के बाद दी गई थीं. अदालत ने माना कि रसीदों से यह स्पष्ट होता है कि 1,600 रुपये सरकारी शुल्क और बकाया कर के रूप में लिए गए थे. इसी आधार पर न्यायालय ने ग्रामसेवक नरेंद्र इंगले को निर्दोष घोषित करते हुए बरी कर दिया.

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