अमरावती जिले में पूरी तरह फेल हुई सोयाबीन की बुआई
बीजों में नहीं हुआ अंकुरण, बुआई हुई बर्बाद

* किसानों को मुफ्त बीज देने की घोषणा, आदेश का इंतजार
अमरावती/दि.23- जिले में खरीफ सीजन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों द्वारा बोया गया सोयाबीन बीज या तो अंकुरित नहीं हुआ है या फिर उगने के बाद फसल सूखने लगी है. ऐसी स्थिति में किसानों पर दोबारा बुआई (दुबार पेरणी) का संकट मंडरा रहा है. राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को जिला नियोजन समिति (डीपीसी) निधि से मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की घोषणा की है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट शासनादेश जारी नहीं होने से किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
* 2,601 किसानों ने दर्ज कराई शिकायत
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार अमरावती जिले में सोयाबीन बीज के अंकुरण नहीं होने की 2,601 शिकायतें प्राप्त हुई हैं. इनमें से लगभग 1,800 किसानों के खेतों का निरीक्षण संबंधित समितियों द्वारा किया जा चुका है. किसानों का आरोप है कि महंगे दामों पर खरीदे गए बीजों ने अपेक्षित अंकुरण नहीं दिया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
* 14 बीज कंपनियों पर 42 एफआईआर
जिला नियोजन समिति की बैठक में पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देश के बाद कृषि विभाग ने कार्रवाई करते हुए विभिन्न बीज कंपनियों के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई हैं. प्रयोगशाला जांच में बीज नमूनों के मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने के बाद जिले की 14 बीज कंपनियों के खिलाफ 42 एफआईआर विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज की गई हैं. अब इन मामलों में पुलिस की आगे की कार्रवाई पर किसानों और कृषि क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं.
* मुफ्त बीज की घोषणा, लेकिन प्रक्रिया अस्पष्ट
सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया है कि प्राकृतिक कारणों या बीजों की खराब गुणवत्ता के कारण यदि किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ती है तो उन्हें डीपीसी निधि से मुफ्त बीज उपलब्ध कराया जाएगा. हालांकि अभी तक न तो इसके लिए औपचारिक शासनादेश जारी हुआ है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि लाभार्थियों का चयन कैसे होगा, प्रस्ताव कौन तैयार करेगा और निधि वितरण के मानदंड क्या होंगे. इसी कारण जिला नियोजन विभाग स्तर पर भी फिलहाल कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है.
* किसानों में बढ़ी चिंता
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दोबारा बुआई का उपयुक्त समय तेजी से समाप्त हो रहा है. यदि सहायता समय पर नहीं मिली तो प्रभावित किसानों को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा और उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा. किसानों का सवाल है कि यदि सहायता योजना का लाभ समय पर नहीं मिला, तो मुफ्त बीज की घोषणा केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी.
* बारिश की कमी से बढ़ी परेशानी
इस वर्ष खरीफ सीजन में बुआई के बाद लगभग 12 दिनों तक बारिश का लंबा अंतराल रहा. हालांकि पिछले कुछ दिनों में वर्षा होने से फसलों को कुछ राहत मिली है, लेकिन जिले में अब भी औसत वर्षा की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. कृषि क्षेत्र को अब भी अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार है, ताकि फसलों की स्थिति सुधर सके.
* कृषि विभाग की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वर्षा के अभाव में फसलों पर पानी के तनाव को कम करने के लिए 1 प्रतिशत पोटैशियम नाइट्रेट (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) अथवा 19:19:19 घुलनशील उर्वरक का छिड़काव करें. विशेषज्ञों के अनुसार इससे फसलें 6 से 8 दिनों तक नमी की कमी का बेहतर सामना कर सकती हैं और पौधों की वृद्धि प्रभावित होने से बच सकती है.
* शासनादेश का इंतजार
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी (डीएसएओ) राहुल सातपुते ने बताया कि बीज कंपनियों के खिलाफ शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई है और किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराने संबंधी शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है. फिलहाल जिले के हजारों किसान सरकार की घोषणा के धरातल पर उतरने और राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो दोबारा बुआई और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है.





