दो बेटों की मौत के बाद टूटा किसान पिता
62 वर्षीय ज्ञानेश्वर मालेकार ने फांसी लगाकर दी जान

* दो साल पहले दोनों बेटों ने भी की थी आत्महत्या
* एक ही परिवार के तीन पुरूषों की आत्महत्या से दहला परिसर
यवतमाल /दि.24– किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात रहनेवाले यवतमाल जिले के तमाम प्रयासों के बावजूद किसान आत्महत्या का सत्र रोके नहीं रूक रहा. इसी बीच रालेगांव तहसील के पिंपलापुर में एक हृदयविदारक घटना घटित हुई है. जहां पर फसलों की लगातार होती बर्बादी, सिर पर चढते कर्ज के बोझ तथा सिंचाई हेतु जरूरी विद्युत कनेक्शन नहीं मिलने जैसी वजहों से निराश हो चुके 62 वर्षीय बुजुर्ग किसान ज्ञानेश्वर मालेकार ने कल गुरुवार 23 जुलाई को तडके 5 बजे के आसपास अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. विशेष उल्लेखनिय है कि, दो वर्ष पूर्व ज्ञानेश्वर मालेकार के दो बेटों ने भी ऐसी ही वजहों के चलते परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी. जिसके बाद ज्ञानेश्वर मालेकार ने जैसे-तैसे खुद को संभाला और अपने पांच एकड खेत में किसानी करते हुए अपना और अपनी पत्नी का उदरनिर्वाह करते रहे. लेकिन दो बेटों को खो चुका यह बुजुर्ग पिता आखिरकार उन्हीं वजहों के सामने टूट गया, जिन वजहों के चलते उसके दो बेटों ने अपनी जान दी थी तथा अब दो बेटों को खो चुके बुजुर्ग किसान पिता ने भी उसी तरिके से अपनी जान दे दी. जिसके चलते पहले दो बेटो को खो चुकी ज्ञानेश्वर मालेकार की पत्नी अब इस दुनिया में अकेली रह गई.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक, ज्ञानेश्वर मालेकार ने अपने पांच एकड खेत में सिंचाई करने हेतु लाखों रूपये खर्च करते हुए बोअरवेल की खुदाई की थी और सिंचाई की व्यवस्था होने के लिए विद्युत कनेक्शन हेतु सभी आवश्यक प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए जरूरी शुल्क की रकम भी भरी थी. परंतु लंबा समय बीत जाने के बावजूद उन्हें विद्युत कनेक्शन नहीं मिला था. जबकि दूसरी ओर बारिश का अभाव रहने के चलते फसलों की लगातार बर्बादी हो रही थी और ज्ञानेश्वर मालेकार के सिर पर कर्ज का बोझ भी लगातार बढ रहा था. ऐसे में ज्ञानेश्वर मालेकार ने भी अपने बेटों द्वारा अपनाए गए रास्ते पर चलने का पर्याय चुना और गुरुवार की सुबह अपने ही घर में खुद को फांसी लगाते हुए आत्महत्या कर ली. इस घटना के उजागर होते ही पिंपलापुर गांव सहीत रालेगांव तहसील व यवतमाल जिले में अच्छा खासा हडकंप मचा हुआ है. साथ ही अब यह मांग भी जोर पकड रही है कि, सरकार ने इस मामले की गंभीर दखल लेते हुए ज्ञानेश्वर मालेकार की पत्नी को तुरंत ही आर्थिक सहायता देनी चाहिए. साथ ही साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ती को टालने हेतु प्रलंबित विद्युत कनेक्शन सहित किसानों के अन्य मसलों पर त्वरीत निर्णय लेना चाहिए.