840 ग्राम की नवजात को डॉक्टरों ने दिया नया जीवन

26 सप्ताह में जन्मी बच्ची 60 दिन के इलाज के बाद स्वस्थ

* सरकारी मेडिकल कॉलेज की बड़ी सफलता
यवतमाल /दि.25- वसंतराव नाईक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के डॉक्टरों ने महज 26 सप्ताह में जन्मी और केवल 840 ग्राम वजन की नवजात बच्ची को सफल उपचार देकर नया जीवन दिया है. करीब 60 दिनों तक चले विशेष उपचार के बाद अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और उसका वजन बढ़कर 2.2 किलोग्राम हो गया है.
यवतमाल तहसील के बोरगांव निवासी मजदूर दंपति की तीसरी संतान के रूप में जन्मी इस बच्ची की मां सुषमा हनुमान तिड़के (30) को गर्भावस्था के साढ़े छह महीने पूरे होने से पहले ही रक्तस्राव और उच्च रक्तचाप की गंभीर समस्या हो गई थी. स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टरों ने तत्काल प्रसव कराने का निर्णय लिया. जन्म के समय बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी. बाल रोग विशेषज्ञों ने तुरंत कृत्रिम श्वास (वेंटिलेशन) शुरू कर उसे नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया. उपचार के दौरान बच्ची को 12 दिन वेंटिलेटर और 13 दिन सी-पैप मशीन के सहारे रखा गया. बेहतर विकास के लिए दवाओं और विशेष पोषण के साथ उसकी लगातार निगरानी की गई. इलाज के दौरान उसे तीन बार रक्त और दो बार प्लेटलेट्स भी चढ़ाए गए.
चिकित्सकों के अथक प्रयासों से बच्ची की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और 60 दिन बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. जिलाधिकारी विकास मीणा ने अस्पताल पहुंचकर बच्ची के स्वास्थ्य की जानकारी ली और बाल रोग एवं प्रसूति विभाग की पूरी टीम की सराहना की. उन्होंने कम वजन वाले नवजातों के उपचार में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सेवाओं की प्रशंसा की. विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यंत कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं में मस्तिष्क, दृष्टि और सुनने की क्षमता से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है. हालांकि समय पर उपचार और नियमित फॉलोअप से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की मानसिक, दृष्टि और श्रवण क्षमता सामान्य रूप से विकसित हो रही है तथा उसका नियमित फॉलोअप जारी है.

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