पेपर लीक व परीक्षा घोटालों की होगी फास्ट ट्रैक सुनवाई
नागपुर में गठित हुई विशेष अदालत, 11 मामले भी दर्ज

* प्रतिवादियों को नोटीस भी जारी, सुनवाई होगी जल्द शुरू
* टीईटी, विश्वविद्यालय और शिक्षा मंडल की परीक्षाओं से जुड़े मामलों को मिलेगी प्राथमिकता
* डमी उम्मीदवार, फर्जी परीक्षार्थी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल और संगठित परीक्षा घोटालों के मामलों का होगा त्वरित निपटारा
नागपुर/दि.4 – देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा घोटालों और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाले गैरकानूनी हस्तक्षेपों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नागपुर में स्थापित विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय ने अपना कामकाज शुरू कर दिया है. न्यायालय के समक्ष अब तक 11 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें टीईटी, विश्वविद्यालय तथा शिक्षा मंडल की परीक्षाओं से जुड़े कथित गैरप्रकार शामिल हैं. सभी मामलों में प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और जल्द ही नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है.
जानकारी के अनुसार, परीक्षा प्रक्रियाओं में बढ़ती अनियमितताओं, प्रश्नपत्रिका लीक होने की घटनाओं तथा भर्ती परीक्षाओं में सामने आए संगठित घोटालों को देखते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने नागपुर और छत्रपति संभाजीनगर में विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित करने की अधिसूचना जारी की थी. इसका उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की सुनवाई को तेज करना और दोषियों को समयबद्ध तरीके से दंडित करना है.
* विशेष न्यायालय में होगी परीक्षा अपराधों की सुनवाई
उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार दिवानी न्यायाधीश (वरिष्ठ स्तर) तथा अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी गुलशन आर. कोलते की नियुक्ति नागपुर स्थित विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में की गई है. यह न्यायालय विशेष रूप से परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाले अपराधों की सुनवाई करेगा. इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का प्रतिबंध) अधिनियम-2024, भारतीय न्याय संहिता-2023 तथा महाराष्ट्र प्रतिबंधक गैरप्रकार अधिनियम-1982 के अंतर्गत दर्ज मामलों को शामिल किया गया है.
* किन मामलों की होगी सुनवाई?
विशेष न्यायालय में जिन मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी, उनमेंं पेपर लीक और प्रश्नपत्रिका गड़बड़ी, डमी उम्मीदवारों का उपयोग, फर्जी परीक्षार्थी बनाकर परीक्षा दिलाना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से नकल, भर्ती परीक्षाओं में संगठित धोखाधड़ी, परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी या मानव हस्तक्षेप, परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले आपराधिक षड्यंत्र आदी का समावेश रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करना ही इस विशेष न्यायालय की प्रमुख जिम्मेदारी होगी.
* 11 मामलों में जारी हुई नोटिस
नागपुर के जिला सरकारी वकील नितीन तेलगोटे ने विशेष न्यायालय के कामकाज शुरू होने की पुष्टि करते हुए बताया कि न्यायालय के समक्ष फिलहाल 11 मामले लंबित हैं. सभी मामलों में संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दी गई है और आवश्यक प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है. उन्होंने बताया कि न्यायालय में दर्ज अधिकांश मामले टीईटी परीक्षा, विश्वविद्यालय परीक्षाओं तथा शिक्षा मंडल से संबंधित परीक्षा गैरप्रकारों से जुड़े हैं. आगामी दिनों में इन मामलों की नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है.
* विशेष सरकारी वकील और स्टाफ की भी होगी नियुक्ति
न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए इस विशेष न्यायालय हेतु अलग से विशेष सरकारी वकील तथा आवश्यक प्रशासनिक और न्यायिक कर्मचारियों की नियुक्ति भी की जाएगी. इससे मामलों के त्वरित संचालन और सुनवाई में सहायता मिलेगी.
* वर्षों से लंबित मामलों को मिलेगी गति
पिछले कुछ वर्षों में देश और राज्य में नीट, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी), विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल के अनेक मामले सामने आए हैं. इन घटनाओं के कारण लाखों विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा तथा व्यापक जनआक्रोश भी देखने को मिला. कई मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बावजूद नियमित अदालतों में लंबित मामलों की संख्या अधिक होने के कारण सुनवाई में काफी विलंब हो रहा था. परिणामस्वरूप दोषियों को समय पर सजा नहीं मिल पाती थी और न्याय प्रक्रिया लंबी खिंच जाती थी. विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय की स्थापना से अब ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए लिया जाएगा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आने और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होने की उम्मीद बढ़ी है.
* विद्यार्थियों में जगी नई उम्मीद
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि विशेष न्यायालयों की स्थापना से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही पेपर लीक और भर्ती घोटालों में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा. विद्यार्थियों और अभिभावकों का भी मानना है कि यदि परीक्षा अपराधों के मामलों का समयबद्ध निपटारा हुआ और दोषियों को शीघ्र सजा मिली, तो प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर लोगों का विश्वास मजबूत होगा.
* विशेष न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में शामिल प्रमुख अपराध
पेपर लीक और प्रश्नपत्रिका चोरी, डमी उम्मीदवारों के माध्यम से परीक्षा देना, फर्जी परीक्षार्थी बनाकर धोखाधड़ी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नकल, संगठित परीक्षा घोटाले, भर्ती प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का प्रतिबंध) अधिनियम-2024 के तहत दर्ज अपराध, भारतीय न्याय संहिता-2023 और महाराष्ट्र प्रतिबंधक गैरप्रकार अधिनियम-1982 के अंतर्गत आने वाले परीक्षा संबंधी अपराध.