सरकारी ठेकेदारों का 18-19 अगस्त को आज़ाद मैदान में महाआंदोलन

86,662 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर उबल रहा ठेकेदार वर्ग

* अमरावती से 100 से अधिक ठेकेदार होंगे शामिल
अमरावती/दि.17 – महाराष्ट्र में विकास कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले सरकारी ठेकेदार अब अपने बकाया भुगतानों को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं. राज्य के विभिन्न शासकीय विभागों पर सरकारी ठेकेदारों के 86,662 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान लंबित होने का दावा करते हुए महाराष्ट्र राज्य शासकीय ठेकेदार फेडरेशन ने 18 और 19 अगस्त को मुंबई के आज़ाद मैदान में दो दिवसीय राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. इस आंदोलन में विदर्भ सहित पूरे राज्य के हजारों ठेकेदारों के शामिल होने की संभावना है, जबकि अमरावती जिले से लगभग 100 ठेकेदार आंदोलन में भाग लेने के लिए मुंबई रवाना होंगे.
फेडरेशन का कहना है कि राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए वर्षों से सड़क, भवन, सिंचाई, जलापूर्ति, ग्रामीण विकास और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का कार्य करने वाले ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं मिलने से निर्माण क्षेत्र गहरे आर्थिक संकट में फंस गया है. कई ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति डगमगा चुकी है, जबकि बैंक ऋण, ब्याज, श्रमिकों का वेतन और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
* वर्षों से लंबित है भुगतान का प्रश्न
महाराष्ट्र राज्य शासकीय ठेकेदार फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार, बकाया भुगतान के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार के समक्ष समय-समय पर निवेदन, पत्राचार और बैठकों के माध्यम से लगातार प्रयास किए गए. संबंधित विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान भी इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस और संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका. फेडरेशन का आरोप है कि 15 अगस्त 2026 तक भी बड़ी मात्रा में पात्र बिलों का भुगतान नहीं किया गया है. इससे हजारों ठेकेदारों की आर्थिक योजना पूरी तरह प्रभावित हो रही है. कई छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों को अपने व्यवसाय को चलाने के लिए निजी ऋण लेने पड़ रहे हैं, जबकि कुछ को कार्य बंद करने की नौबत तक आ गई है.
* ठेकेदारों पर बढ़ता जा रहा आर्थिक दबाव
फेडरेशन के अनुसार, भुगतान में देरी का सबसे बड़ा असर निर्माण क्षेत्र की पूरी श्रृंखला पर पड़ रहा है. ठेकेदारों को एक ओर बैंक ऋणों का ब्याज चुकाना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों का वेतन, मशीनरी का रखरखाव, डीजल-पेट्रोल खर्च, निर्माण सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की देनदारियां, जीएसटी और अन्य वैधानिक करों का भुगतान भी करना पड़ रहा है. कई परियोजनाओं में कार्य पूरा होने के बावजूद बिलों का भुगतान न होने से ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) समाप्त हो रही है. इसका सीधा असर राज्य में चल रहे विकास कार्यों की गति पर भी पड़ सकता है. फेडरेशन का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो भविष्य में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर असर पड़ सकता है.
* आज़ाद मैदान में दो दिवसीय शक्ति प्रदर्शन
इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र राज्य शासकीय ठेकेदार फेडरेशन ने 18 और 19 अगस्त को मुंबई के ऐतिहासिक आज़ाद मैदान में आंदोलन का निर्णय लिया है. आंदोलन के माध्यम से राज्य सरकार का ध्यान बकाया भुगतान के गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा. फेडरेशन का कहना है कि यह आंदोलन केवल भुगतान के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में ठेकेदारों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक स्थायी और प्रभावी वित्तीय व्यवस्था की मांग को लेकर भी आयोजित किया जा रहा है.
* विदर्भ से होगा बड़ा प्रतिनिधित्व
आंदोलन को सफल बनाने के लिए विदर्भ के 11 जिलों से बड़ी संख्या में ठेकेदारों को मुंबई पहुंचाने की तैयारी की गई है. अमरावती जिला ठेकेदार संघ ने भी अपने सदस्यों से अधिक से अधिक संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है. संघ के पदाधिकारियों के अनुसार अमरावती जिले से करीब 100 ठेकेदार इस आंदोलन में भाग लेंगे. विदर्भ ठेकेदार संगठन के अध्यक्ष नितीन डहाके, अमरावती जिला ठेकेदार संघ के पदाधिकारी प्रमोद काकड़े, रविंद्र गुल्हाणे, प्रदीप चड्ढा, गोपाल राठी और विनोद चांडक सहित अन्य नेताओं ने ठेकेदारों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है.
* विकास कार्यों की निरंतरता पर भी उठे सवाल
फेडरेशन का कहना है कि राज्य में सड़कें, पुल, शासकीय इमारतें, ग्रामीण विकास परियोजनाएं, सिंचाई योजनाएं और जलापूर्ति परियोजनाएं ठेकेदारों के माध्यम से ही क्रियान्वित होती हैं. ऐसे में यदि ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो विकास कार्यों की गति प्रभावित होना स्वाभाविक है. ठेकेदारों का तर्क है कि सरकार विकास कार्यों की अपेक्षा तो समय पर करती है, लेकिन भुगतान में महीनों और वर्षों की देरी होने से पूरा निर्माण क्षेत्र संकट में आ जाता है. इसलिए भुगतान व्यवस्था में सुधार और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
* सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा
महाराष्ट्र राज्य शासकीय ठेकेदार फेडरेशन ने राज्य सरकार से आंदोलन को गंभीरता से लेने और तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर समाधान निकालने की मांग की है. फेडरेशन का कहना है कि यदि सरकार समयबद्ध भुगतान और भविष्य की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट आश्वासन देती है तो निर्माण क्षेत्र में व्याप्त असंतोष कम हो सकता है. फिलहाल, 86,662 करोड़ रुपये के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा राज्य की विकास परियोजनाओं और निर्माण उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है. अब सभी की निगाहें 18 और 19 अगस्त को आज़ाद मैदान में होने वाले आंदोलन और उसके बाद सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं.
* ठेकेदारों की सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें
आंदोलन के दौरान राज्य सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी जाएंगी.
– 15 अगस्त 2026 तक लंबित सभी पात्र बिलों का तत्काल भुगतान किया जाए.
– प्रत्येक विभाग में लंबित देयकों की विभागवार समीक्षा कर भुगतान का निश्चित समयबद्ध कार्यक्रम घोषित किया जाए.
– बकाया भुगतान के लिए आवश्यक निधि की तत्काल व्यवस्था की जाए.
– मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, संबंधित विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फेडरेशन की संयुक्त बैठक आयोजित की जाए.
– विभागवार चर्चा कर भुगतान में आ रही वास्तविक प्रशासनिक एवं वित्तीय अड़चनों को दूर किया जाए.
– भविष्य में ठेकेदारों के बिल लंबे समय तक लंबित न रहें, इसके लिए स्थायी वित्तीय तंत्र विकसित किया जाए.
* विभागवार बकाया राशि का दावा
– फेडरेशन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विभागों पर निम्न राशि लंबित है.
विभाग अनुमानित बकाया राशि (करोड़ रुपये)
सार्वजनिक बांधकाम विभाग 17,500
आदिवासी विकास विभाग 9,881
ग्राम विकास विभाग 1,181
जलापूर्ति विभाग 40,000
जलसंपदा विभाग 7,000
पर्यटन विभाग 1,100
अन्य विभाग 10,000
कुल अनुमानित बकाया 86,662

 

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