‘नो-एंट्री’ लगाकर नहीं चलेगा, माल परिवहन सुचारु करने के लिए ठोस उपाय करें
विधायक सुलभा खोडके व संजय खोडके ने दी सूचना

* मालवाहक संगठनों की पुलिस आयुक्तालय में अहम बैठक
* जीवनावश्यक वस्तुओं के वाहनों को राहत देने पर मंथन
* सीपी राकेश ओला करेंगे प्रतिबंधित मार्गों का ऑन-स्पॉट निरीक्षण
अमरावती/दि.22 – शहर में बढ़ती आबादी, वाहनों की संख्या और बाहरी जिलों से आने वाले मालवाहक वाहनों की बढ़ती आवाजाही के कारण यातायात व्यवस्था लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है. इसी के चलते अमरावती पुलिस प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के लिए लागू की गई नई ‘नो-एंट्री’ अधिसूचना को लेकर अब व्यापारियों और मालवाहक संगठनों में नाराजगी सामने आने लगी है. संगठनों का कहना है कि कड़े प्रतिबंधों से शहर की सार्वजनिक माल परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर व्यापार तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ रहा है.
इसी मुद्दे को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त को पुलिस आयुक्त राकेश ओला के दालन में मालवाहक संगठनों और पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में विधायक सुलभा खोडके ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘सिर्फ नो-एंट्री लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए व्यावहारिक और प्रभावी उपाय करने होंगे.’
* जीवनावश्यक वस्तुओं के वाहनों को मिले छूट
सुलभा खोडके ने कहा कि शहर में यातायात नियंत्रण जरूरी है, लेकिन सभी प्रकार के मालवाहक वाहनों पर एक जैसा प्रतिबंध लगाने से व्यापार और आवश्यक सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इसलिए मालवाहक वाहनों की प्रकृति और उनके द्वारा ढोई जाने वाली सामग्री के आधार पर नियमों में आवश्यक शिथिलता दी जानी चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से अनाज, खाद्यान्न, जीवनावश्यक वस्तुओं तथा अन्य अत्यावश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को नो-एंट्री के दौरान निर्धारित शर्तों के साथ प्रवेश की अनुमति देने की जरूरत बताई.
* शहर की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
बैठक में विधान परिषद सदस्य संजय खोडके ने कहा कि शहर के प्रमुख व्यापारिक और परिवहन मार्ग ही नो-एंट्री व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. होटल गौरी इन चौक से बडनेरा एवं पुराने बायपास मार्ग, राजुरा नाका से नागपुरी गेट और ट्रांसपोर्ट नगर, पंचवटी-शेगांव नाका-कठोरा मार्ग, वेलकम टी-पॉइंट से एमआईडीसी कॉरिडोर, दस्तूर नगर-गद्रे चौक, चपराशीपुरा-रेलवे स्टेशन तथा गर्ल्स हाईस्कूल से इर्विन चौक जैसे मार्गों के आसपास शहर की प्रमुख बाजारपेठ, अनाज मंडी और आवश्यक वस्तुओं के व्यापारिक केंद्र स्थित हैं. उन्होंने कहा कि इन मार्गों पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित होने से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है और शहर का आर्थिक चक्र बाधित हो रहा है.
* ‘नो-एंट्री’ खत्म होते ही वाहनों की भीड़ का खतरा
संजय खोडके ने यह भी कहा कि सभी प्रकार के वाहनों पर समान नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है. माल परिवहन के स्वरूप अलग-अलग हैं. ऐसे में यदि भारी, मध्यम और हल्के मालवाहक वाहनों को एक ही समय पर शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, तो नो-एंट्री खत्म होते ही वाहनों का एक साथ शहर में प्रवेश करने से यातायात सुरक्षा और जाम की नई समस्या पैदा हो सकती है. इसलिए महत्वपूर्ण मार्गों और समय के अनुसार चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में शिथिलता देने तथा मालवाहक वाहनों के लिए यातायात का बेहतर नियोजन करने का सुझाव उन्होंने दिया.
* 2 टन से अधिक क्षमता वाले वाहनों पर दिनभर प्रतिबंध
बैठक में पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने नो-एंट्री व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया कि शहर के पुराने बायपास, बाजारपेठ, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों के आसपास भारी वाहनों की आवाजाही से नागरिकों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा था. सुपर एक्सप्रेस हाईवे शुरू होने के बावजूद पुराने मार्गों से शहर में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों को नियंत्रित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है. अधिसूचना के अनुसार 2 टन से अधिक क्षमता वाले अधिकांश व्यावसायिक मालवाहक वाहनों को सुबह 6.30 बजे से रात 9.30 बजे तक शहर में प्रवेश पर रोक है. हालांकि अत्यावश्यक और महत्वपूर्ण सेवाओं से जुड़े वाहनों को सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे तक नो-एंट्री आदेश से छूट दी गई है.
* इन क्षेत्रों में भारी वाहनों पर स्थायी रोक
पुलिस प्रशासन के अनुसार परकोटा क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध लगाया गया है. इसके अलावा घनी आबादी वाले क्षेत्रों के साथ गांधी चौक, अंबापेठ, राजापेठ, रवीनगर, बजरंग टेकड़ी, विलासनगर, मोरबाग, मसानगंज, पटवा चौक तथा गर्ल्स हाईस्कूल से इर्विन चौक मार्ग पर भी भारी वाहनों के प्रवेश पर स्थायी रोक की जानकारी बैठक में दी गई.
* सीपी करेंगे खुद प्रतिबंधित मार्गों का निरीक्षण
मालवाहक संगठनों की मांगों और जनहित को ध्यान में रखते हुए पुलिस आयुक्त राकेश ओला ने महत्वपूर्ण आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि वे स्वयं प्रतिबंधित मार्गों का ऑन-स्पॉट निरीक्षण करेंगे और यातायात की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के बाद निर्धारित शर्तों के आधार पर कुछ मार्गों और समय में मालवाहक वाहनों को सीमित छूट देने की संभावनाओं की जांच करेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान ‘नो-एंट्री’ अधिसूचना अस्थायी स्वरूप की है और निश्चित अवधि के लिए लागू की गई है. सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए सभी पक्षों से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए आवश्यकता पड़ने पर अधिसूचना में संशोधन और सुधार किए जाएंगे.
* व्यापारी और ट्रांसपोर्टर संगठनों की बड़ी मौजूदगी
बैठक में विधायक सुलभा खोडके, विधान परिषद सदस्य संजय खोडके और पुलिस आयुक्त राकेश ओला के साथ पुलिस उपायुक्त यशवंत सोलंके, पुलिस उपायुक्त श्याम घुगे, पुलिस उपायुक्त प्रांजली सोनवणे, सहायक पुलिस आयुक्त संजय खताले, यातायात शाखा के पुलिस निरीक्षक वैभव पानसरे सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे. इसके अलावा जनाब अख्तर हुसेन, संजय ककरानिया, अशोक अग्रवाल, गोविंद सोमाणी, सुरेश जैन, मेराज खान पठाण, वसीम खान सहित विभिन्न व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए.
अमरावती होलसेल ग्रेन-शुगर-किराना मर्चेंट एसोसिएशन, सक्करसाथ रिफाइनरी तेल एसोसिएशन, अमरावती महानगर चेंबर ऑफ कॉमर्स, अमरावती गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, अमरावती खदान एवं क्रशर ओनर्स एसोसिएशन, क्रेडाई अमरावती, अमरावती जिला मोटर चालक-मालक माल परिवहन एसोसिएशन, अमरावती जिला कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन, अमरावती मिनी ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की अमरावती शाखा, रेडीमिक्स कंक्रीट एसोसिएशन तथा अमरावती चालक-मालक ट्रक एसोसिएशन सहित अनेक संगठनों के पदाधिकारियों ने बैठक में अपनी समस्याएं और सुझाव रखे. बैठक के बाद अब नजर पुलिस आयुक्त के प्रस्तावित ऑन-स्पॉट निरीक्षण पर है. यदि प्रतिबंधित मार्गों और समय में व्यावहारिक शिथिलता दी जाती है, तो एक ओर यातायात व्यवस्था नियंत्रित रखने और दूसरी ओर शहर की आवश्यक माल आपूर्ति तथा व्यापारिक गतिविधियों को राहत देने के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद है.





