गैस, दूध, चीनी और अदरक महंगे, अब चाय की एक घूंट भी पड़ेगी भारी
स्टॉल पर 7 रुपये तो होटल में 10 से 15 रुपये तक पहुंची चाय की कीमत

* चाय प्रेमियों की जेब पर बढ़ा बोझ
धामणगांव रेलवे/दि.22 – बारिश की फुहारें, ठंडी हवाएं और हाथों में गरमागरम चाय का कप-मानसून और चाय का रिश्ता बेहद पुराना है. लेकिन इस साल बढ़ती महंगाई ने चाय के इस स्वादिष्ट रिश्ते में भी खटास घोल दी है. गैस, दूध और चीनी के दाम बढ़ने के बाद अब अदरक की कीमतों में तेजी ने चाय विक्रेताओं की परेशानी और बढ़ा दी है. इसका सीधा असर चाय की कीमतों पर दिखाई देने लगा है.
मानसून में अदरक वाली गरम चाय की मांग बढ़ जाती है. ऐसे में अदरक के बढ़े दाम का असर चाय स्टॉल से लेकर होटल और रेस्टोरेंट तक दिखाई दे रहा है. एक कप चाय तैयार करने के लिए दूध, चीनी, चाय पत्ती, अदरक, गैस और पानी समेत कई चीजों की लागत जुड़ती है. इन सभी चीजों के दाम बढ़ने से चाय विक्रेताओं के लिए पुराने भाव में चाय बेचना मुश्किल हो गया है.
* स्टॉल पर 7, होटल में 10 से 15 रुपये
अमरावती शहर और आसपास के क्षेत्रों में चाय स्टॉल पर साधारण चाय की कीमत करीब 7 रुपये प्रति कप है. वहीं होटल और रेस्टोरेंट में चाय की गुणवत्ता एवं प्रकार के अनुसार 10 से 15 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. बढ़ती लागत के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और बदलाव की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है.
* कप छोटा, कीमत वही रखने की कोशिश
कुछ चाय विक्रेताओं ने बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर सीधे डालने के बजाय कप का आकार छोटा करने का तरीका अपनाया है. चाय की कीमत को यथासंभव स्थिर रखते हुए कप में चाय की मात्रा कम की जा रही है. हालांकि, ग्राहक इसे लेकर नाराजगी भी व्यक्त कर रहे हैं.
* विक्रेताओं के सामने दोहरी परेशानी
चाय विक्रेता सचिन वानखड़े के मुताबिक दाम बढ़ाने पर ग्राहक नाराज होते हैं और दाम नहीं बढ़ाने पर लागत निकालना मुश्किल हो जाता है. दूध, चीनी, गैस और अदरक सभी महंगे होने से एक कप चाय की कीमत तय करना अब पहले जितना आसान नहीं रहा.
* चाय प्रेमियों का बजट बिगड़ा
ग्राहक रोशन झंझाड ने कहा कि बारिश के मौसम में गरम चाय पीने का मन करता है, लेकिन रोजाना दो-तीन कप चाय पीने पर महीने का खर्च बढ़ जाता है. इसलिए अब चाय पीने से पहले भी जेब का हिसाब लगाना पड़ रहा है.
* एफडीए की कार्रवाई का भी डर
महंगाई के साथ चाय विक्रेताओं को खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता का भी ध्यान रखना पड़ रहा है. अन्न एवं औषधि प्रशासन द्वारा खाद्य सुरक्षा नियमों, स्वच्छता और आवश्यक लाइसेंस के पालन को लेकर कार्रवाई की जाती है. ऐसे में विक्रेताओं को बढ़ती लागत के साथ-साथ नियमों का पालन करने की चुनौती भी झेलनी पड़ रही है. कुल मिलाकर, मानसून में गरम चाय की मांग भले ही बढ़ गई हो, लेकिन गैस, दूध, चीनी और अदरक की बढ़ती कीमतों ने चाय का स्वाद महंगा कर दिया है. अब चाय प्रेमियों को अपनी पसंदीदा चाय की हर घूंट के साथ अपनी जेब का भी ध्यान रखना पड़ रहा है.





