उसने’ अपने बच्चे की मौत होने के बाद चुराया दूसरे का बच्चा

नागपुर के बच्चा चोरी मामले में हुआ सनसनीखेज खुलासा

* डागा अस्पताल से बुरखाधारी महिला ने चुराई थी नवजात बच्ची
* सरकारी योजना का झांसा देकर ले गई थी बच्ची को अपने साथ
* पुलिस ने महज 8 घंटे में बच्ची को किया बरामद, बच्चा चोरनी हिरासत में
नागपुर/दि.22 – स्थानीय डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल से नवजात बच्ची चोरी होने की सनसनीखेज घटना ने शुक्रवार को पूरे शहर को हिला दिया. हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर महज आठ घंटे के भीतर बच्ची को सकुशल बरामद कर उसकी मां की गोद में वापस सौंप दिया गया. मामले में सामने आया है कि अपना नवजात बच्चा खोने के गहरे सदमे से गुजर रही एक महिला ने ही यह वारदात अंजाम दी थी.
जानकारी के अनुसार, गोलीबार चौक निवासी प्रभाशक्ति पाठराबे (30) को प्रसूति के लिए 19 अगस्त को डागा अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 21 अगस्त की देर रात प्रभाशक्ति पाठराबे ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया. प्रसूति के बाद प्रभाशक्ति को अस्पताल के तीसरे मंजिल स्थित वार्ड क्रमांक-1 में रखा गया था. शुक्रवार सुबह करीब 11.30 बजे बुर्का पहने एक अज्ञात महिला पाठराबे के परिजनों के पास पहुंची. उसने दावा किया कि नवजात शिशु को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए आवेदन करना आवश्यक है. महिला ने परिवार का विश्वास जीत लिया और बच्ची की दादी को साथ लेकर अस्पताल के ओपीडी क्षेत्र की ओर चली गई. भीड़भाड़ का फायदा उठाकर उसने वृद्ध महिला को चकमा दिया और नवजात बच्ची को लेकर फरार हो गई. काफी देर तक महिला और बच्ची का कोई पता नहीं चलने पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को सूचना दी. नवजात के गायब होने की खबर मिलते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया. बच्ची की मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि बड़ी संख्या में पहुंचे परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई.
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस उपायुक्त राहुल मदने, नित्यानंद झा तथा कोतवाली और गणेशपेठ पुलिस की टीमें अस्पताल पहुंचीं. अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर संदिग्ध महिला एक ऑटो रिक्शा में बैठकर जाती दिखाई दी. इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने तेजी से जांच आगे बढ़ाई और यशोधरानगर क्षेत्र के एक घर तक पहुंच गई. पुलिस ने वहां छापा मारकर महज आठ घंटे के भीतर नवजात बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया और उसे उसकी मां को सौंप दिया.
पुलिस जांच में पता चला कि बच्ची को ले जाने वाली महिला आशियाना अंजुम सैयद अल्ताफ मूलतः छत्रपति संभाजीनगर की निवासी है और उसका मायका नागपुर के यशोधरानगर क्षेत्र में है. आशियाना ने 3 अगस्त को एक बच्ची को जन्म दिया था, लेकिन 11 अगस्त को उसकी नवजात बेटी की मृत्यु हो गई थी. अपनी बच्ची की मौत के बाद वह गहरे मानसिक आघात से गुजर रही थी. पुलिस के अनुसार, इसी सदमे और मातृत्व के विरह ने उसे यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया. जब पुलिस उसके घर पहुंची, तो वह घबराकर बच्ची को लेकर भागने लगी. इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह घायल हो गई. वर्तमान में उसका उपचार मेयो अस्पताल में चल रहा है.
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अस्पताल परिसर से दिनदहाड़े नवजात बच्ची का बाहर निकल जाना सुरक्षा तंत्र की बड़ी चूक माना जा रहा है. हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बच्ची सुरक्षित मिल गई, लेकिन इस घटना ने अस्पताल प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त करने की आवश्यकता का अहसास करा दिया है. पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और महिला के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है.

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