विशेष कोर्ट ने ठुकराई प्रमुख आरोपी की आरोपमुक्त करने की अर्जी

अमरावती का उमेश कोल्हे हत्याकांड

* न्यायालय ने कहा – आरोपी के विरुद्ध मजबूत साक्ष्य मौजूद, वह प्रमुख षडयंत्रकारी
मुंबई/दि.7- राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए की विशेष अदालत ने अमरावती में जून 2022 में हुए दवा विक्रेता उमेश कोल्हे हत्या प्रकरण के प्रमुख आरोपी की आरोपमुक्त करने की याचिका ठुकरा दी है. कोर्ट ने याचिका ठुकराते हुए कहा कि, न केवल प्रथमदृष्ट्या बल्कि आरोपी के विरुद्ध मजबूत साक्ष्य मौजूद है.
भाजपा नेता नुपूर शर्मा द्वारा किए गए कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद कोल्हे द्वारा समाज माध्यम पर उसका समर्थन करने की पोस्ट डालने से कोल्हे की भीषण हत्या कर दी गई थी. पुलिस और जांच एजेंसियों ने आतीब राशीद सहित 11 आरोपियों के विरुद्ध हत्या और गैरकानूनी गतिविधि प्रतिबंधक कानून यूएपीए के तहत अपराध दर्ज किया था.
विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर बाविस्कर ने निर्णय में कहा कि, इस प्रकरण में आतीब राशीद सहित सभी आरोपी का एक ही लक्ष्य था. वे मानसिक रुप से अपने लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए एकत्रित थे. समान हेतु उनका रहा. यह उद्देश्य था, उमेश कोल्हे का खून करने का. समाज विशेष के लोगों में आतंक मचाने के उद्देश्य से घातक हथियारों का उपयोग कोल्हे हत्या प्रकरण में किया गया. यह आपराधिक षडयंत्र रहने का दावा आरोप पत्र में किया गया है. कोर्ट ने माना कि, आरोप सिद्ध करने लायक मजबूत साक्ष्य उपलब्ध है. यह कहते हुए अदालत ने आतीब राशीद की आरोप मुक्त करने की अर्जी नामंजूर कर दी.
राशीद के वकील ने कोर्ट में काफी तर्क दिए कि, उसे गलती से इस प्रकरण में फंसाया गया है. जबकि परिस्थितिजन्य घटनाक्रम में उसका कोई सीधा सहभाग इस हत्या प्रकरण में नहीं है. वकील ने दलील दी कि, राशीद कोई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन का सदस्य नहीं है कि, उस पर यूएपीए के तहत कार्रवाई की जाए. मगर न्यायालय ने इन सभी दलीलों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि, यूएपीए की धारा 15 में ऐसा कोई जरुरी नहीं कि, आतंकी वारदात किसी प्रतिबंधित संगठन द्वारा ही की जाती है.
अदालत ने यह भी कहा कि, राशीद इस हत्याकांड में मुख्य साजिशकर्ता रहा. जिसने सह आरोपियों को खून करने के वास्ते प्रेरित किया. जांच एजेंसियों का भी आरोप है कि, राशीद ने अपनी मोटर साइकिल पर दोनों सह आरोपी मोहम्मद शोएब और शाहिम अहमद को पीछे बिठाकर घटनास्थल पर लाया था, जहां कोल्हे की हत्या हुई. अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया कि, राशीद ने हत्या के तुरंत बाद आरोपी इरफान को संदेशा भेजा था कि, अमित मेडिकल संचालक को चाकू से मार दिया गया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि, राशीद ने बाद में अपने मोबाइल हैंडसेट से डाटा हटा दिया था. पकडे जाने के डर से उसने ऐसा किया था. कोर्ट ने पाया कि, अभियोजन पक्ष ने काफी इलेक्ट्रॉनिक और मौखिक सबूत राशीद के विरुद्ध प्रस्तुत किए हैं. कॉल का विवरण अर्थात सीडीआर से भी खुलासा होता है कि, राशीद और हकिकत में हमला करने वाले आरोपी के बीच 100 से अधिक कॉल हुई. इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज में भी अपराध स्थल के पास राशीद की उपस्थिति देखी गई. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर न्यायालय ने राशीद की याचिका ठुकरा दी.

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