8 लाख की रिश्वत में से 5 लाख ‘साहब’ के? शिकायत में जिक्र से आबकारी विभाग में हड़कंप

अमरावती/दि.26- अचलपुर आबकारी उपविभाग के दुय्यम निरीक्षक आकाश जाधव की रिश्वत लेते गिरफ्तारी के बाद मामले में कथित रकम के बंटवारे को लेकर नया विवाद सामने आया है. शिकायत में उल्लेख होने की बात सामने आई है कि नए रेस्टोरेंट-बार का परमिट जारी करने के लिए मांगी गई 8 लाख रुपये की रिश्वत में से 3 लाख रुपये जाधव और 5 लाख रुपये ‘गर्जे साहेब’ को दिए जाने थे. हालांकि, संबंधित वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका की अभी पुष्टि नहीं हुई है. नागपुर एसीबी इस पहलू की जांच कर रही है.
नए रेस्टोरेंट-बार का परमिट जारी करने के लिए रिश्वत मांगने के आरोप में नागपुर एसीबी ने सोमवार शाम आकाश जाधव को 2.5 लाख रुपये लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था. एसीबी के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर मांगी गई 8 लाख रुपये की रिश्वत की पहली किश्त थी. शिकायत का सत्यापन करने के बाद एसीबी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की.
* शिकायत में ‘गर्जे साहेब’ के नाम का उल्लेख
एसीबी के जांच अधिकारी राहुल चव्हाण के अनुसार शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में उल्लेख किया था कि दुय्यम निरीक्षक जाधव ने अपने हिस्से के 3 लाख रुपये और ‘गर्जे साहेब’ के लिए 5 लाख रुपये देने की बात कही थी. अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत में जिस वरिष्ठ अधिकारी का उल्लेख किया गया है, उसकी इस प्रकरण में वास्तव में कोई भूमिका थी या नहीं. जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी.
* 300 से अधिक शराब कारोबारियों से ‘वसूली’ की चर्चा
जाधव की गिरफ्तारी के बाद अमरावती जिले के शराब कारोबारियों में कथित ‘वसूली’ को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि जिले में 300 से अधिक देशी-विदेशी शराब दुकानों, बीयर बार और परमिट रूम संचालकों से हर महीने 1,500 से 2 हजार रुपये लिए जाने की चर्चा है. इसे विभागीय स्तर पर नियमित वसूली किए जाने के आरोप के रूप में देखा जा रहा है. यह भी चर्चा है कि नए अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद कुछ शराब कारोबारियों पर कथित तौर पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और एसीबी की जांच में इन दावों की वास्तविकता सामने आना बाकी है.
* अमरावती के बजाय नागपुर एसीबी से संपर्क क्यों?
इस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा अमरावती के बजाय नागपुर एसीबी से संपर्क किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने स्थानीय स्तर पर दबाव या प्रभाव की आशंका के चलते नागपुर एसीबी का रुख किया था. हालांकि, इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था, यह भी जांच का विषय है. फिलहाल कार्रवाई नागपुर एसीबी की टीम ने की है और मामले की जांच भी उसी के अधिकारियों द्वारा की जा रही है.





