बाघों की मौत के आंकड़ों पर हाईकोर्ट सख्त

एनटीसीए ने बताई अपडेट में देरी की वजह

* मौतों के सत्यापन में लग रहा समय
* राज्य और केंद्र के आंकड़ों में अंतर पर कोर्ट में उठे सवाल
नागपुर /दि.29 – राज्य में लगातार हो रही बाघों की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने गंभीरता दिखाई है. इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए अदालत ने जनहित याचिका दर्ज की है. गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने बाघों की मौत के आंकड़ों में अंतर को लेकर अपना पक्ष रखा.
* सत्यापन में लग रहा समय
एनटीसीए ने मौखिक रूप से अदालत को बताया कि बाघों की मौत की प्रत्येक घटना का सत्यापन करने में समय लग रहा है. इसी कारण एनटीसीए की वेबसाइट पर मौत के आंकड़ों को अपडेट करने में देरी हो रही है. प्राधिकरण के अनुसार, इसी वजह से राज्य सरकार और केंद्र सरकार के आंकड़ों में अंतर दिखाई दे रहा है. इससे पहले मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी ने राज्य वन विभाग और एनटीसीए के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा अदालत के समक्ष उठाया था. अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया गया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच एनटीसीए के सेंट्रलाइज्ड इंफॉर्मेशन सिस्टम में दर्ज 16 बाघों की मौत राज्य के आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं की गई है.
* 12 साल में 298 बाघों की मौत का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि पिछले 12 वर्षों में महाराष्ट्र में कुल 298 बाघों की मौत हुई है. इनमें कम से कम 110 मौतें कथित तौर पर इंसानों के कारण और ऐसे कारणों से हुईं, जिन्हें रोका जा सकता था. बाघों की मौत के सही आंकड़ों, उनके कारणों और संरक्षण व्यवस्था को लेकर यह मामला अब गंभीर बन गया है. अदालत में हुई सुनवाई के दौरान आंकड़ों की पारदर्शिता और सही जानकारी सामने आने का मुद्दा प्रमुखता से उठा. मामले में आगे की सुनवाई के दौरान बाघों की मौत के आंकड़ों और उनके सत्यापन को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.

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